बीपीएल छात्रों की पढ़ाई पर संकट, निजी स्कूलों के खिलाफ डीसी कार्यालय पर अभिभावक संघ का धरना


जमशेदपुर : शहर के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) वर्ग के छात्रों की शिक्षा एक बार फिर संकट में पड़ती नजर आ रही है। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को जमशेदपुर अभिभावक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त कार्यालय, जमशेदपुर के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की।

अभिभावक संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि निजी स्कूलों में पढ़ रहे बीपीएल छात्रों की बकाया शुल्क प्रतिपूर्ति सरकार से समय पर नहीं मिलने के कारण स्कूल प्रबंधन ने सत्र 2026-27 से बीपीएल बच्चों का नामांकन नहीं लेने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही नामांकन लेने की स्थिति में स्कूल फीस में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।
इस निर्णय का अभिभावक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ का कहना है कि आरटीई नियम 2011 के भाग-9 के अनुसार, जिन विद्यालयों को सरकार से पट्टे पर या मुफ्त/रियायती दर पर भूमि मिली है, उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय माना जाएगा। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन द्वारा बीपीएल बच्चों को प्रवेश देने से इनकार करना कानून का उल्लंघन है।
इसके अलावा संघ ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 का हवाला देते हुए कहा कि इस अधिनियम की धारा 7ए(1)(5) के अनुसार शुल्क समिति द्वारा तय की गई फीस दो वर्षों तक प्रभावी रहती है। ऐसे में जिन निजी स्कूलों ने पहले ही 2025-26 सत्र में फीस बढ़ा दी है, उनके द्वारा दोबारा फीस बढ़ाना नियमों के खिलाफ है।
अभिभावक संघ ने मांग की है कि टाटा लीज क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अधिनियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बीपीएल वर्ग के बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। संघ ने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।



