मस्जिद के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर तो मच गया बवाल,


दिल्ली: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जि़द के पास अवैध ढांचे को हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया है। पुलिस ने पथराव कर रहे उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रात करीब 2 बजे से शुरू हुई। MCD के कर्मचारी 30 से ज्यादा बुलडोजर के साथ मस्जिद के पास पहुंचे और अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया। अब पुलिस ने पत्थरबाजी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को पथराव के मामले में हिरासत में लिया है।साल 1975 से 1977 के बीच देश में इमरजेंसी लगी हुई थी. लोकतंत्र का गला घोंटा गया था. विपक्ष का मुंह बंद कर दिया गया था. विरोधियों को जेल में डाल दिया गया था. इमरजेंसी के वक्त भी बुलडोजर एक्शन से दिल्ली सहम गई थी. यह बात साल 1976 की है. उस वक्त भी दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन हुआ था. अब और तब में केवल इतना अंतर है कि आज का एक्शन कोर्ट के आदेश पर है, जबकि उस वक्त का एक्शन संजय गांधी के आदेश पर हुआ था. इमरजेंसी के वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं. इंदिरा गांधी भले ही पीएम रही हों, मगर संजय गांधी ही असल फैसले लेते थे. उस वक्त संजय गांधी की बात को काटने की हिम्मत किसी में नहीं होती थी. संजय गांधी ने जो फैसला लिया, उसे मिटाना असंभव होता था. कारण कि संजय का फैसला मतलब पत्थर की लकीर.उस वक्त संजय गांधी ने दिल्ली को सुंदर बनाने के नाम पर तुर्कमान गेट पर बुलडोजर चलवाया था. तब डीडीए के वाइस चेयरमैन थे जगमोहन. कहते हैं कि जगमनोहन के लिए संजय गांधी भगवान हुआ करते थे. फरवरी 1976 में संजय गांधी तुर्कमान गेट के दौरे पर गए थे. तभी उनके दिमाग में बुलडोजर एक्शन का खयाल आया था. इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वाली लेखिका कैथरीन फ्रैंक कहती हैं, ‘संजय ने अपनी मां इंदिरा गांधी से इच्छा प्रकट की थी कि वो चाहते हैं कि उन्हें तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ-साफ दिखाई दे. इंदिरा गांधी ने संजय की कही बात को इनकार नहीं किया. इसके बाद उस समय डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन ने संजय गांधी के इन मौखिक शब्दों को आदेश की तरह लिया.’




