श्रीनाथ विश्वविद्यालय में ‘बी मास्टर ऑफ योरसेल्फ’ कार्यशाला का आयोजन, स्वामी निर्विशेषानंद हुए शामिल

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आदित्यपुर: आदित्यपुर स्थित श्रीनाथ विश्वविद्यालय में शनिवार को एमबीए छात्रों के लिए एक दिवसीय प्रेरणादायक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया जिसका शीर्षक था ‘बी मास्टर ऑफ योरसेल्फ’। यह कार्यशाला सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक सेंटर फॉर इनर रिसोर्स डेवलपमेंट में आयोजित हुई। इस सत्र का संचालन प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्वामी निर्विशेषानंद तीर्थ ने किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर आत्मबल, स्पष्ट सोच और नेतृत्व क्षमता का विकास करना था। अपने प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक संबोधन में स्वामी निर्विशेषानंद तीर्थ ने छात्रों को अपने अंदर छिपी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें सही दिशा में विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जीवन और नेतृत्व में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मनियंत्रण, भावनात्मक संतुलन और मजबूत रिश्तों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी जी ने संवादात्मक चर्चा, व्यावहारिक उदाहरणों और जीवन से जुड़े अनुभवों के माध्यम से छात्रों को आत्मविश्वास बढ़ाने, संतुलित निर्णय लेने और बेहतर पारस्परिक संबंध विकसित करने के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और गतिशील पेशेवर माहौल में प्रभावी नेतृत्व के लिए मानसिक स्पष्टता, सकारात्मक सोच और आत्मअनुशासन बेहद आवश्यक हैं।
कार्यशाला के दौरान एमबीए छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भावनाओं को नियंत्रित करने, एकाग्रता बढ़ाने तथा सकारात्मक मानसिकता विकसित करने के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। इस सत्र ने छात्रों को आत्मचिंतन और आत्मजागरूकता की ओर प्रेरित किया, जो उनके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए आधार बन सकता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. जे. राजेश और वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मृ्त्युंजय महतो ने स्वामी निरविशेषानंद तीर्थ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों और नेतृत्व कौशल से भी समृद्ध करती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीनाथ विश्वविद्यालय छात्रों के समग्र विकास के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है, जिससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के बीच गहरी प्रेरणा और आत्मचिंतन का माहौल देखने को मिला। यह कार्यशाला सभी छात्रों के लिए एक यादगार और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुई।

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