बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के निलंबन के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे फोन पर बात की,


बरेली: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा सोमवार को अचानक इस्तीफा देने का मामला तूल पकड़ रहा है। अलंकार ने ये आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था कि सरकार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही है। हालांकि उनके इस्तीफे को सरकार ने स्वीकार नहीं किया बल्कि उन्हें निलंबित कर दिया। अलंकार अग्निहोत्री ने UGC और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया, जो सरकार ने स्वीकार नहीं किया बल्कि उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद सियासत गरमा गई। अलंकार अग्निहोत्री के निलंबन के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे बात की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने फोन पर अलंकार अग्निहोत्री का अभिनंदन किया और धर्म के क्षेत्र में ऊंचा पद देने का भरोसा दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हम चाहते हैं कि आपके जैसे लोग सनातन की सेवा में आगे आएं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री से बात करते हुए कहा, “आपके कदम का सनातन समाज अभिनंदन करता है। हम चाहते हैं कि आपके जैसे लोग सनातन की सेवा में आगे आएं। जो पद सरकार ने दिया था, उससे ऊंचा पद आपको देंगे।”उत्तर प्रदेश सरकार ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया है. बरेली मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. निलंबन अवधि में केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा. जांच पूरी होने तक उन्हें शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध किया गया है. विशेष सचिव द्वारा निलंबन आदेश जारी किया गया.
आपको बता दें कि कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा है.अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों, विशेषकर यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के बटुक शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दिया था. उन्होंने यूजीसी नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा था कि ये कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को दूषित करेंगे. अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया कि माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शंकराचार्य के बटुक शिष्यों के साथ मारपीट हुई और प्रशासन ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.इस्तीफे के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह से मुलाकात को लेकर लगाए गए आरोपों पर डीएम ने सफाई देते हुए कहा कि अग्निहोत्री के साथ कोई दुर्व्यवहार या बंधक बनाए जाने जैसी घटना नहीं हुई. उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया और इस्तीफे के सवाल पर टिप्पणी से इनकार किया.इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रवीण सिंह ऐरन ने इसे प्रशासनिक दबाव और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश को डर से नहीं, संविधान से चलाया जाना चाहिए.




