गड़वा में पशुधन योजना घोटाले का पर्दाफाश: सप्लायर ने अपने व परिवार के खाते में करोड़ों रुपए जमा किए


झारखंड: झारखंड के गड़वा जिले में पशुधन विभाग की एक सहायता योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि एक लीगल सप्लायर ने सरकारी राशि को व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर अपने परिवार के उपयोग में ला लिया। मामले में प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब ₹2.3 करोड़ की राशि की गड़बड़ी पाई गई है, जिसे विषम वर्षावस्था व पशु वितरण के नाम पर एक ही परिवार ने अपने कब्जे में कर लिया।

अनुभवी जिला पशु अधिकारी ने बताया कि यह राशि “पशु वितरण व कैंक्टि सामग्री” के लिए निर्धारित थी, लेकिन उन जनसंपर्ककार्यों के नाम पर खर्च के बजाय निजी लेन-देनों में चली गई। विभाग की आंतरिक ऑडिट टीम ने सप्लायर व उसके परिवार की बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड को स्क्रूटनी के लिए भेजा है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि सप्लायर ने अपने भाई-बहनों के नाम पर फर्जी वितरण कूपन बनाए और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से प्रत्येक कूपन के बदले राशि प्राप्त की। इस दौरान “स्कीम लाभार्थी” के रूप में दर्ज किए गए कई गृहिणियों व किसान समूहों का नाम सिर्फ कागजों में ही मौजूद पाया गया।
राज्य पशुधन मंत्री ने बयान में कहा है कि राज्य सरकार इस तरह की कूटरचित गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषीय कर्मचारी व सप्लायर को “ब्लैकलिस्टेड” किए जाएंगे। साथ ही कहा गया कि भविष्य में पंजीकृत किसानों-पशुपालकों को लाभ सीधे उनके बैंक खाते में जमा करने की प्रक्रिया को त्वरित व पारदर्शी बनाया जाएगा।
विश्लेषक इस मामले को झारखंड की कृषि-पशुधन योजनाओं में भ्रष्टाचार व कार्यान्वयन खामियों की गंभीर रिपोर्ट बताते हैं। उन्होंने यह सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को ऑडिट व्यवस्था सशक्त करने और लाभार्थियों की अनिवार्य फील्ड सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता है।



