अमिताभ बच्चन ने देखी ‘इक्कीस’, शेयर किया फिल्म का पहला रिव्यू

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Mumbai:अमिताभ बच्चन ने अपने करीबी दोस्त धर्मेंद्र और नाती अगस्त्य नंदा की आने वाली फिल्म ‘इक्कीस’ की स्पेशल स्क्रीनिंग देखी और उसके प्रदर्शन की खूब तारीफ की. दिग्गज अभिनेता ने अपने ब्लॉग पर एक भावुक नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अगस्त्य को परफेक्ट एक्टर बताया.’इक्कीस’ में 24 साल के अगस्त्य नंदा ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभाई है. अरुण खेत्रपाल 1971 के भारत-पाक युद्ध में बसंतर की लड़ाई में सिर्फ 21 साल की उम्र में शहीद हो गए थे. उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जो उस समय भारत के सबसे कम उम्र के प्राप्तकर्ता थे.ब्‍लॉग में अमिताभ बच्‍चन ने उस समय को याद किया जब उन्होंने पहली बार अगस्त्य को बेटी श्वेता नंदा की गोद में देखा था। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, ‘भावनाएं बह रही हैं… जैसा कि आज रात हुआ, जब मैंने पोते को ‘इक्कीस’ में बेहतरीन काम करते देखा… वह समय जब उसकी मां, श्वेता को ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया जा रहा था, क्योंकि उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी… उसका जन्म… कुछ ही घंटों बाद उसे गोद में लेना, और इस बात पर चर्चा करना कि क्या उसकी आंखें नीली थीं… उस समय तक जब वह थोड़ा बड़ा हुआ और उसे अपनी बाहों में लिया, और वह मेरी दाढ़ी से खेलता था… उसके बड़े होने तक… एक्टर बनने के उसके निजी फैसले तक, और आज रात उसे फ्रेम में देखना। जब भी वह फ‍िल्म के फ्रेम में आता है तो मैं उससे नजरें नहीं हटा पाता।’अमिताभ बच्‍चन ने आगे नाती की तारीफ में कुछ शब्द जोड़ते हुए लिखा, ‘उसकी मैच्योरिटी, उसके परफॉर्मेंस में बिना मिलावट वाली ईमानदारी, उसकी मौजूदगी उस किरदार को सही ठहराती है जिसे वह निभाता है… कुछ भी बनावटी या दिखावटी नहीं, बस अरुण खेत्रपाल सैनिक, जिसने 21 साल की उम्र में अपनी बहादुरी से 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश की रक्षा की… कुछ भी ज्यादा नहीं, बस हर शॉट में परफेक्शन… जब वह फ्रेम में होता है तो आप सिर्फ उसे ही देखते हैं… और यह कोई नाना नहीं बोल रहा है, यह सिनेमा का एक अनुभवी दर्शक बोल रहा है।’बिग बी ने अपनी पोस्ट के आख‍िर में लिखा, ‘फिल्म अपने प्रेजेंटेशन में… अपनी राइटिंग में… अपने डायरेक्शन में… एकदम परफेक्ट है। और जब यह खत्म होती है… तो खुशी और गर्व के आंसुओं से आंखें भर जाती हैं… कुछ बोल नहीं पाते… खामोशी में… वह खामोशी जो मेरी है… मेरी समझ है… किसी और की नहीं… प्यार।’

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