वेनेजुएला और ईरान के बाद अब ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर


अमेरिका: अमेरिका एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ाने के केंद्र में आ गया है। वेनेजुएला में हस्तक्षेप और ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर ऐसे संकेत दिए हैं, जिसने यूरोप समेत पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी कार्रवाइयों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी चर्चा अभी थमी भी नहीं थी।अमेरिका केवल अपनी साख ही नहीं गंवा रहा है, बल्कि एक ऐसे गैर जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो विश्व व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दुनिया को अराजकता की ओर धकेल रहा है। इसके दुष्परिणाम अमेरिका को भी भोगने होंगे, क्योंकि विश्व के तमाम राष्ट्र उनसे तंग आ चुके हैं और यह एक तथ्य है कि आज अमेरिका उतना सशक्त नहीं, जितना पहले हुआ करता था।ट्रंप अपने अहं को पूरा करने के लिए जिस तरह अपने मित्र राष्ट्रों से भी बैर मोल ले रहे हैं, वह उन्हें महंगा पड़ सकता है, क्योंकि उनका मनमानापन विश्व के देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने को मजबूर कर रहा है। यह बहुत दिनों तक संभव नहीं कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका तो मनमानी करे और विश्व से नियम-कानूनों के हिसाब से चलने की अपेक्षा करे।वे जिस तरह अस्थिरता फैला रहे हैं, उससे विश्व शांति ही नहीं, अर्थव्यवस्था भी खतरे में पड़ रही है। ट्रंप ने भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ थोप रखा है। इसमें 25 प्रतिशत व्यापार समझौता न हो पाने और 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदने के कारण है। यदि वे और टैरिफ बढ़ाते हैं तो यह एक तरह से भारत पर पाबंदी लगाने जैसा होगा।यह ठीक है कि भारत को अमेरिकी सहयोग की आवश्यकता है, लेकिन उसे उसके अनुचित दबाव का प्रतिकार करना होगा। भारत को ट्रंप की शर्तों पर व्यापार समझौता करने से बचना होगा। भारत को यह भी आभास हो जाना चाहिए कि अमेरिका से व्यापार समझौता होने में और देरी हो सकती है। भारत को ट्रंप को उनकी भाषा में जवाब देने की जरूरत नहीं, लेकिन यह स्पष्ट करने में संकोच नहीं करना चाहिए कि वह उनके बेजा व्यवहार के समक्ष झुकने वाला नहीं।




