शादी के बाद पत्नी की ज़िंदगी पर नहीं पति का कब्जा! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा – महिला की पर्सनल लाइफ रहती है जिंदा

0
Advertisements
Advertisements


Lok Alok News डेस्क | कोर्ट रिपोर्ट: – महिलाओं की स्वतंत्रता और निजता को लेकर एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि शादी के बाद भी किसी महिला की व्यक्तिगत ज़िंदगी खत्म नहीं हो जाती। उसका ‘पर्सनल स्पेस’ और ‘राइट टू प्राइवेसी’ उसी तरह बरकरार रहता है जैसे किसी अविवाहित व्यक्ति का होता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें पति अपनी पत्नी के खिलाफ उसे ‘अवैध संबंधों’ के आरोप में नीचा दिखाने और सामाजिक रूप से बदनाम करने की कोशिश कर रहा था।

मामला तब और गंभीर हो गया जब पति ने कोर्ट में यह दावा किया कि पत्नी शादी के बाद भी अपनी मर्जी से मोबाइल इस्तेमाल करती है, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती है और कुछ पुरुष मित्रों से बातचीत भी करती है — जिसे उसने “चरित्रहीनता” करार दिया। लेकिन हाईकोर्ट ने इस पूरे तर्क को नकारते हुए महिला के पक्ष में टिप्पणी दी और कहा कि “किसी महिला की व्यक्तिगत आज़ादी और निजता उसके वैवाहिक दर्जे पर निर्भर नहीं करती। एक विवाहित महिला भी उतनी ही स्वतंत्र है जितनी अविवाहित।”

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि महिला के मोबाइल, सोशल मीडिया या उसके निजी संवादों पर अनावश्यक संदेह करना न केवल उसके निजता के अधिकार का हनन है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के दायरे में आता है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि विवाह का अर्थ यह नहीं कि पति को पत्नी की हर निजी बात पर निगरानी रखने का अधिकार मिल जाता है।

इस फैसले के बाद महिला अधिकार संगठनों में भी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। कोर्ट का यह रुख इस बात का संकेत है कि भारत की न्यायपालिका अब महिलाओं की वैवाहिक स्थिति से ऊपर उठकर उनके संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता दे रही है।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

Thanks for your Feedback!

You may have missed