विधायक चंपई सोरेन के हस्तक्षेप से फिलहाल टला आदित्यपुर का अतिक्रमण ड्राइव, बोले मेन रोड से हटाएं, ब्रांच रोड छोड़ दें

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Saraikela (संजीव मेहता) : विधायक चंपई सोरेन के हस्तक्षेप से फिलहाल सोमवार से चलने वाला आदित्यपुर का अतिक्रमण ड्राइव नगर निगम प्रशासन ने टाल दिया है. बता दें कि नोटिस और माईकिंग के बाद से आदित्यपुर के फुटपाथी दुकानदारों में भय व्याप्त था. वर्षों से सड़क किनारे रोजी रोटी चलाने वाले दुकानदारों ने आज जब अंतिम ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करते हुए विधायक चंपई सोरेन से मिले और गुहार लगाई तो वे इन गरीब दुकानदारों के लिए आदित्यपुर पहुंचे और सुवर्ण रेखा परियोजना के मुख्य अभियंता कार्यालय सभागार में नगर निगम के प्रशासक और उनके अधिकारियों को बुलाकर बैठक की. जिसके बाद उन्होंने प्रशासक से कहा कि फिलहाल आप मेन रोड और सर्विस रोड से अतिक्रमण हटाएं, और ब्रांच रोड छोड़ दें. उनके इस आदेश के बाद आज तत्काल अतिक्रमण के विरुद्ध ड्राइव नहीं चला है, लेकिन आज के बैठक के बाद से अब मुख्य मार्ग के किनारे ठेला खोमचा लगाने वाले स्ट्रीट वेंडरों में भय समा गया है. वे खुद को विधायक का सौतेला पुत्र मानते हुए ठगा महसूस कर रहे हैं औऱ उन्हें इस बात डर हो गया है कि अब तो नगर निगम उनके विरुद्ध कार्रवाई जरूर करेगा और ब्रांच रोड वाले को तो विधायक ने बचा दिया, उन्हें कौन बचाने आएगा.

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* आखिर थाना रोड कब क्लियर होगा ?

शेरे पंजाब चौक से रेलवे फाटक जाने वाले रोड में आदित्यपुर का एकमात्र सरकारी अस्पताल, थाना, पीएचईडी कार्यालय के साथ विद्युत विभाग का कार्यपालक और सहायक अभियंता कार्यालय है, जहां हर दिन हजारों की संख्या में लोग आते जाते हैं जिन्हें सड़क पर लगी दुकानों से भारी परेशानी रोज होती है. आखिर इन कार्यालयों के आवागमन के लिए कब नगर निगम रोड क्लियर करेगी. अब जबकि स्थानीय विधायक ने ब्रांच रोड के अतिक्रमण को संरक्षण देने का एलान कर दिया है तो निगम प्रशासन के लिए यह काम और भी कठिन हो गया है.

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* क्या कहा चंपई ने –

नगर निगम के अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि आप मेन रोड और सर्विस रोड को क्लियर करें, बाकी ब्रांच रोड के अतिक्रमण को नजरअंदाज करें, चूंकि समूचा आदित्यपुर ही अतिक्रमण कर बसा हुआ है. उन्होंने आवास बोर्ड पर उंगली उठाते हुए कहा कि 60-65 साल पूर्व तत्कालीन सरकार ने जमीन का अधिग्रहण कॉमर्शियल पर्पस के लिए नहीं किया था, लेकिन आज आवास बोर्ड ने अधिग्रहित जमीन पर कमर्शियल इमारतें, मॉल, नर्सिंग होम बसा दिया है जो अधिग्रहण नियमों का घोर उल्लंघन है. अब ऐसे में आवास बोर्ड को मूल रैयतदारों को उनकी जमीन का 40 फीसदी हिस्सा वर्तमान दर के तहत भुगतान करे. ऐसी परिस्थिति में फुटपाथी दुकानदारों को उजाड़ना उनके साथ सरासर अन्याय होगा.

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