मणिपुर में कुकी महिला के साथ हुआ था गैंगरेप, दो साल बाद अस्पताल में तोड़ दिया दम


मणिपुर: मणिपुर में गैंगरेप का शिकार हुई पीड़िता की दो साल बाद मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक चुराचांदपुर जिला अस्पताल में आदिवासी पीड़िता ने आखिरी सांस ली। दो साल तक पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी और इंसाफ का इंतजार कर रही थी। उसके जीते जी उसे इंसाफ नहीं मिल पाया।हिंसा के शुरुआती दिनों में युवती का अपहरण कर उसे इम्फाल से लैंगोल ले जाया गया, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसे बिष्णुपुर इलाके में बेसहारा हालत में छोड़ दिया गया। चमत्कारिक रूप से वह बच तो गई, लेकिन उसके शरीर और मन पर पड़े घाव कभी नहीं भर पाए। पीड़िता की मां ने बताया कि घटना से पहले उनकी बेटी बेहद खुशमिजाज और मिलनसार थी। वह इम्फाल में एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी और हमेशा मुस्कुराती रहती थी। लेकिन उस दिन के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। मां के मुताबिक, गंभीर चोटों के कारण उसे सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी थी।पीड़िता ने जुलाई 2023 में मीडिया से बातचीत में अपनी आपबीती साझा की थी। उसने बताया था कि चार हथियारबंद लोग उसे जबरन एक वाहन में ले गए और रास्ते में तथा पहाड़ी इलाके में उसके साथ दरिंदगी की गई। किसी तरह मौका पाकर वह वहां से भाग निकली और एक ऑटो चालक की मदद से सुरक्षित स्थान तक पहुंची। बता दें कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुई हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अपने घरों से बेघर हुए हैं। पीड़िता की मौत ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील और गंभीर बना दिया है।




