क्वांटम कंप्यूटिंग से भारतीय ज्ञान परंपरा तक, रांची विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मेलन; नई पुस्तक का भी लोकार्पण

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रांची : रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में भौतिकी विभाग और झारखंड काउंसिल ऑन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (JCSTI) की ओर से संयुक्त रूप से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, अभियंत्रण और प्रौद्योगिकी का गहरा और परस्पर संबंध रहा है। उनके अनुसार प्राचीन भारत में ये तीनों क्षेत्र अलग-अलग नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में विकसित हुए। उन्होंने शोधार्थियों से प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों को आधुनिक शोध और नवाचार से जोड़कर नए आयाम तलाशने का आह्वान किया।

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सम्मेलन को ई. श्रोडिंगर द्वारा प्रतिपादित समीकरण को समर्पित किया गया है। कोलकाता के इमेरिटस प्रोफेसर जीपी दास ने क्वांटम मैकेनिक्स और मेटेरियल साइंस के बढ़ते मेल पर चर्चा करते हुए कहा कि 21वीं सदी में इस क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने इसे ‘क्वांटम लीप’ बताते हुए कहा कि स्मार्ट, अल्ट्रा फास्ट और सस्टेनेबल मेटेरियल्स भविष्य की तकनीक की दिशा बदल सकते हैं। जेसीएसटीआई के कार्यपालक निदेशक डॉ. राज शेखर प्रसाद और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक प्रो. रणजीत कुमार सिंह ने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे अनुदान की जानकारी दी।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रो. एनआर रॉय और डॉ. कुंतल मुखर्जी द्वारा लिखित पुस्तक ‘Introduction to Quantum Computing’ का लोकार्पण रहा। सम्मेलन में विश्वविद्यालय की साइंस डीन डॉ. वंदना कुमारी, भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह और सम्मेलन संयोजक डॉ. राजकुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार के अनुसार सम्मेलन में कुल 45 प्रतिनिधियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में राहुल कुमार सिंह, रुकैया समन, प्रो. जेएन प्रसाद, डॉ. सतीश चंद्र गुप्ता, डॉ. आशा प्रसाद, डॉ. विनिता शरण, डॉ. मनोज कुमार और डॉ. नवीन कुमार सिन्हा समेत कई शिक्षक, शोधार्थी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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