जंगल बचाने की नई पहल से बदलेगी आदिवासियों की जिंदगी, रोजगार से संरक्षण तक बड़ा अभियान



पलामू :झारखंड का एकमात्र पलामू टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के साथ जंगल में लंबे समय से रह रहे आदिवासी और आदिम जनजाति परिवारों की स्थिति सुधारने पर भी काम कर रहा है। पीटीआर प्रबंधन ने ‘जनभागीदारी से वन संरक्षण’ अभियान के तहत ‘हुनर से रोजगार’ पहल शुरू की है। इसके लिए आदिवासियों की आजीविका, पारंपरिक हुनर और आर्थिक गतिविधियों का सर्वे किया जा रहा है, ताकि बांस शिल्प और औषधीय ज्ञान जैसे पारंपरिक कौशल को बाजार से जोड़कर उन्हें सीधा आर्थिक लाभ मिल सके। महुआ संग्रह के लिए शुरू किए गए जाली मॉडल से पेड़ों के नीचे जाल लगाकर बिना आग लगाए महुआ इकट्ठा किया जा रहा है। इससे जंगलों को आग से बचाने के साथ संग्रहकर्ताओं को बेहतर गुणवत्ता का महुआ और बेहतर कीमत मिल रही है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘वनजीवी दीदी’ और ‘बाघ दीदी’ योजनाओं के तहत चयनित गांवों की शिक्षित महिलाओं को कम्युनिटी एंबेसडर बनाया गया है। वे ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ पर्यावरण-पर्यटन से रोजगार भी पा रही हैं। ‘बाघ देवता’ पहल के जरिए सरना स्थलों और पवित्र उपवनों के संरक्षण में आदिवासियों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। वहीं ‘जंगल कैंप’ से स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड, ट्रैकिंग एक्सपर्ट और होम-स्टे संचालन के अवसर मिले हैं। कोर एरिया से स्वैच्छिक विस्थापन के तहत हाल ही में ‘जैगीर’ गांव का सफल विस्थापन किया गया। परिवारों को पोलपोल के पास 75 एकड़ जमीन पर सड़क, बिजली और परिवहन जैसी सुविधाओं के साथ बसाया जा रहा है तथा प्रति परिवार ₹15 लाख तक मुआवजा या भूमि विकल्प दिया गया है। पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के अनुसार, जंगल और बाघों का स्थायी संरक्षण स्थानीय आदिवासी समुदाय का जीवन स्तर बेहतर किए बिना संभव नहीं है।


