रांची : ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए बंद और सक्रिय कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन गैस के उपयोग पर जोर दिया गया। रांची में आयोजित ऊर्जा विशेषज्ञों की बैठक में आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि भारत में मीथेन गैस का बड़ा भंडार मौजूद है, लेकिन इसका समुचित उपयोग नहीं हो रहा। यदि इस गैस का वैज्ञानिक तरीके से दोहन किया जाए तो इसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को वातावरण में छोड़ने के बजाय उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। इस विषय पर तकनीकी समाधान और भविष्य की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।