झारखंड के जंगलों का होगा वैज्ञानिक मूल्यांकन, वन विभाग ने शुरू की बड़ी पहल



रांची : वन विभाग अब राज्य के जंगलों से मिलने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन कराने जा रहा है. इसके लिए राज्य प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) ने पहल शुरू की है. विभाग ने “झारखंड राज्य में वन पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन” नामक परियोजना के लिए राष्ट्रीय स्तर की कंसल्टिंग एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. इसका उद्देश्य यह समझना है कि राज्य के जंगल मानव जीवन, पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन में कितना योगदान दे रहे हैं.

परियोजना के तहत जंगलों की चार प्रमुख पारिस्थितिकी सेवाओं का अध्ययन किया जाएगा. इसमें प्रोविजनिंग सर्विसेज के अंतर्गत लकड़ी, भोजन और जल संसाधन, रेगुलेटिंग सर्विसेज के तहत जलवायु नियंत्रण और कार्बन अवशोषण, सपोर्टिंग सर्विसेज में मिट्टी निर्माण और पोषक चक्र तथा कल्चरल सर्विसेज के अंतर्गत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व शामिल है. इन सभी सेवाओं का आर्थिक मूल्यांकन भी किया जाएगा.
कैंपा द्वारा जारी सूचना के अनुसार इच्छुक एजेंसियां 16 जून 2026 की शाम 4 बजे तक वन भवन, डोरंडा स्थित कार्यालय में अपने तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव जमा कर सकती हैं. इस परियोजना को लेकर 2 जून 2026 को सुबह 11 बजे प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी. परियोजना की अवधि एक वर्ष तय की गई है. निविदा शुल्क 5 हजार रुपये और बयाना राशि 2 लाख रुपये निर्धारित की गई है. तकनीकी निविदा 17 जून को खोली जाएगी, जबकि वित्तीय बोलियां 25 जून को खोली जाएंगी.
इस कार्य के लिए उन्हीं एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास वन्यजीव, वानिकी और जैव विविधता संरक्षण में कम से कम 12 वर्षों का अनुभव हो तथा जिन्होंने टाइगर कंजर्वेशन प्लान जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर पहले काम किया हो.


