आदित्यपुर नगर निगम में QR सिस्टम लॉन्च के एक महीने बाद भी नहीं बदली आदित्यपुर की तस्वीर, मेयर संजय सरदार के संकल्प और वादों पर उठने लगे सवाल, आखिर ये QR स्कैन था या फिर कोई स्कैम???

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आदित्यपुर : आदित्यपुर नगर निगम ने 2 अप्रैल को बड़े-बड़े दावों और प्रचार के साथ क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली लॉन्च की थी। मंच से कहा गया था कि अब जनता को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए निगम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सिर्फ एक स्कैन में शिकायत दर्ज होकर उसका समाधान होगा। लेकिन एक महीने से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी शहर की जमीनी तस्वीर में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। अब लोग खुलकर पूछने लगे हैं — यह “स्कैन सिस्टम” था या सिर्फ प्रचार का नया स्कैम?

नगर निगम चुनाव के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधियों के आने से व्यवस्था बदलेगी और “जनता के मन की बात” सच में सुनी जाएगी। मेयर संजय सरदार और उनकी टीम ने भी शहर को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन मौजूदा हालात देखकर लोगों की उम्मीदें धीरे-धीरे नाराजगी में बदलती दिख रही हैं। क्योंकि सारे के सारे दावों की  जमीनी स्तर पर पोल खुल चुकी है।

शहर के कई इलाकों में आज भी गंदगी के ढेर, जाम नालियां, खराब स्ट्रीट लाइट और पेयजल संकट जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई की रफ्तार कछुए के चाल जैसी भी नहीं है। और इसी वजह से लोगों का भरोसा सिस्टम से उठने लगा है।

लोगों का कहना है कि यदि डिजिटल सिस्टम लागू करने के बाद भी सड़कों की हालत नहीं बदलती, सफाई व्यवस्था सुधरती नहीं और शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होता, तो फिर ऐसे सिस्टम का फायदा आखिर किसे मिल रहा है? जनता के बीच अब यह चर्चा तेज हो चुकी है कि नगर निगम जमीन पर काम कम और प्रचार का स्कैम ज्यादा कर रहा है।

मेयर संजय सरदार ने लॉन्चिंग के दौरान “क्लीन आदित्यपुर” का संकल्प लिया था, लेकिन एक महीने बाद भी शहर की हालत वही पुरानी कहानी बयां कर रही है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ QR कोड सिस्टम पर नहीं, बल्कि नगर निगम की पूरी कार्यशैली और जवाबदेही पर उठने लगे हैं। और मेयर साहब की संकल्प अब कागज पर ही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनता ने बदलाव के नाम पर वोट दिया था, लेकिन अगर समस्याएं पहले जैसी ही बनी रहें तो फिर डिजिटल व्यवस्था और बड़े-बड़े दावों का क्या मतलब रह जाता है। अब देखने वाली बात होगी कि नगर निगम जनता के बढ़ते सवालों का जवाब काम से देता है या फिर आने वाले दिनों में भी सिर्फ योजनाओं के पोस्टर और लॉन्चिंग कार्यक्रम ही नजर आते रहेंगे।

हालांकि बता दें कि ये वही मेयर साहब है जो कि रियल में काम करे या ना करे लेकिन वायरल रील में अपने रंगदारी का जिक्र जनता तक जरूर पहुंचाते है।

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