महुआडांड़ की शिक्षा व्यवस्था बदहाली की चरम सीमा पर …..50 से अधिक स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, जर्जर भवनों और बिना सुरक्षा के पढ़ रहे हजारों बच्चे….. करोड़ों खर्च के बाद भी धरातल पर फेल शिक्षा व्यवस्था, अभिभावकों में बढ़ी चिंता…

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महुआडांड़: महुआडांड़ प्रखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे गंभीर संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही है। शिक्षा सुधार और बेहतर भविष्य के बड़े-बड़े सरकारी दावों के बीच यहां की जमीनी तस्वीर बेहद चिंताजनक है। जानकारी अनुसार प्रखंड के 50 से अधिक सरकारी विद्यालय आज भी केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। कई स्कूलों में स्थिति ऐसी है कि शिक्षक के किसी बैठक, प्रशिक्षण या अवकाश में चले जाने पर स्कूल बंद होने जैसी नौबत आ जाती है।स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा तो करता है, लेकिन गांवों में बच्चों को आज भी बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं। कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो कई जगह भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

*जर्जर भवनों में चल रही पढ़ाई, हर दिन हादसे का डर*

प्रखंड के कई सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। कहीं दीवारों में बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, तो कहीं छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। बरसात और तेज हवा के दौरान कई स्कूलों में भय का माहौल बना रहता है। कई विद्यालयों के किचन रूम भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं, जिससे मध्यान भोजन बनाने वाले कर्मियों और बच्चों की सुरक्षा खतरे में बनी हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से भवन मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हो रही।

*आंधी-तूफान के बीच बिना तड़ित चालक चल रहे स्कूल*

इन दिनों महुआडांड़ क्षेत्र में लगातार तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की घटनाएं हो रही हैं। इसके बावजूद दर्जनों विद्यालयों में अब तक तड़ित चालक (Lightning Arrester) नहीं लगाया गया है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के स्कूल जाने को मजबूर हैं। यदि किसी दिन वज्रपात जैसी घटना हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

*शिक्षक संकट से प्रभावित हो रही पढ़ाई*

एक शिक्षक पर पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी होने से बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी कार्य, मध्यान भोजन निगरानी, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बड़ी चुनौती बन चुकी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और आदिवासी बच्चों का भविष्य धीरे-धीरे अंधकार की ओर बढ़ रहा है।

*पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी बदहाल*

कई विद्यालयों में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। कहीं चापाकल खराब पड़ा है तो कहीं पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। बच्चों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। वहीं कई स्कूलों के शौचालय उपयोग के लायक नहीं बचे हैं, जिससे छात्राओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

*कार्रवाई की मांग तेज*

ग्रामीणों, अभिभावकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि महुआडांड़ के विद्यालयों की वास्तविक स्थिति की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही खाली पड़े शिक्षक पदों पर जल्द नियुक्ति, जर्जर भवनों की मरम्मत, तड़ित चालक की स्थापना और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त किया जाए।

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