जामडीह में अस्पताल सिर्फ नाम का! स्वास्थ्यकर्मी नदारद, इलाज के अभाव में मासूम की जान पर आया संकट

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Jharkhand : महुआडांड़ प्रखंड के जामडीह गांव में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल नजर आ रही है। गांव में लाखों रुपये की लागत से अस्पताल भवन तो बना दिया गया, लेकिन आज तक वहां स्वास्थ्य सेवाएं बहाल नहीं हो सकीं। अस्पताल में न डॉक्टर हैं, न नर्स और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मौजूद रहता है। स्थिति इतनी खराब है कि अस्पताल परिसर अब पशुओं का अड्डा बन चुका है।रविवार को इस लापरवाही की गंभीर तस्वीर उस समय सामने आई जब गांव आए एक मेहमान के छोटे बच्चे की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं रहने के कारण परिवार में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से निजी डॉक्टर बुलाकर बच्चे का इलाज कराया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचते तो बड़ा हादसा हो सकता था।ग्रामीणों ने बताया कि जामडीह अस्पताल लंबे समय से बंद पड़ा है और इसकी शिकायत कई बार प्रशासन तक पहुंचाई जा चुकी है। खबरें भी लगातार प्रकाशित होती रही हैं,  जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती कागजों में की गई है, लेकिन धरातल पर कोई भी कर्मी ड्यूटी करते नजर नहीं आता।ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करती है, लेकिन जामडीह की स्थिति उन दावों की पोल खोल रही है। अस्पताल रहने के बावजूद मरीजों को दूसरे गांव और दूसरे राज्य के डॉक्टरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल में तत्काल डॉक्टर, एएनएम और स्वास्थ्यकर्मियों की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी भी ग्रामीण या बच्चे की जान इलाज के अभाव में खतरे में न पड़े।

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