झारखंड में नेशनल लोक अदालत का होगा आयोजन, 1.53 लाख मुकदमों की सुनवाई


रांची : झारखंड में आयोजित होने वाली लोक अदालत को लेकर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (Jhalsa) के अध्यक्ष ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों और प्री-लिटिगेशन विवादों का त्वरित और आपसी सहमति से समाधान करना है। इसके लिए राज्य भर में विशेष बेंचों का गठन किया जाता है, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा किया जाता है।उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निष्पादन तेज और सरल प्रक्रिया से होता है, जिससे अदालतों पर लंबित केसों का बोझ भी कम होता है। इसमें आपसी समझौते के आधार पर मामलों का समाधान किया जाता है और यह प्रक्रिया पूरी तरह सुलभ और निशुल्क होती है। लोक अदालत का पैमाना बेहद व्यापक है. राज्यभर में कुल 300 न्यायिक बेंचों का गठन किया गया है. आंकड़ों के अनुसार, अदालतों में लंबित लगभग 1.53 लाख मुकदमों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. इसके अलावा, 21.24 लाख प्री-लिटिगेशन (अदालत पहुंचने से पूर्व के विवाद) मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है. कुल मिलाकर 22 लाख से ज्यादा विवादों के निपटारे की योजना है.

झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद इसका वर्चुअल उद्घाटन करेंगे.झालसा की ओर से लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक मामले लोक अदालत के माध्यम से निपटाए जा सकें और लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सके।


