डिप्टी मेयर चुनाव: आश्वासन के बाद बेवफा बने पार्षदों की  तलाश कर रहे है विजेता और हार का सामना करने वाले उम्मीदवार, पाँच पार्षदों में कौन तीन में मारी पलटी यह अब राज बनकर निर्वाचन आयोग के लिफाफे में हो गया दफ़्न

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आदित्यपुर:  आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर चुनाव में इस बार जबरदस्त रोमांच और राजनीतिक उठापटक देखने को मिली। चुनाव से पहले तक दोनों खेमे पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन समर्थित अर्चना सिंह और पूर्व विधायक अरविंद सिंह समर्थित गुट अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे थे। दोनों ओर से 20 से 22  पार्षद के समर्थन का दावा किया जा रहा था। लेकिन आदित्यपुर नगर निगम में कुल 35 पार्षद ही है। यानी यह साफ़ था की एक उम्मीदवार को पराजय का सामना करना तय है। बावजूद इसके इन्ही पार्षदों के दम पर दोनों पक्ष अपने अपने संख्या बल गिनवा रहे थे। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे चुनाव में पाँच पार्षदों की भूमिका सबसे अहम रही, जिनके रुख को लेकर दोनों पक्ष आश्वस्त थे। लेकिन नतीजे आते ही पूरा समीकरण पलट गया और अंकुर सिंह को डिप्टी मेयर घोषित कर दिया गया।

चुनाव में खुले तौर पर अर्चना सिंह के समर्थन में वार्ड 1 के वनमाली दास, वार्ड 3 के पिंको चौधरी, वार्ड 4 के शुभम पांडे, वार्ड 5 की विनीता कुमारी, वार्ड 11 की मंजु देवी, वार्ड 12 के मोतीलाल बिसोई, वार्ड 14 की सुनीता बेरा, वार्ड 16 की राजरानी महतो, वार्ड 24 के रामप्रसाद मुखी, वार्ड 25 की उत्तरा प्रधान, वार्ड 26 की कुमारी वेदना गोप, वार्ड 27 की रिंकी कुमारी, वार्ड 29 की अर्चना सिंह, वार्ड 32 की मालती देवी और वार्ड 35 की संगीता सामड़ शामिल रहे।

वहीं अंकुर सिंह के समर्थन में वार्ड 6 के धनंजय गुप्ता, वार्ड 7 के परितोष बैज, वार्ड 8 की मोना बेसरा, वार्ड 9 के दुर्गा चरण बेसरा, वार्ड 13 के शांतनु घोष, वार्ड 15 के नथुनी सिंह, वार्ड 17 की नीतू शर्मा, वार्ड 18 के अंकुर सिंह, वार्ड 19 के ब्रजेश कुमार सिंह, वार्ड 20 की प्रभावती देवी, वार्ड 21 की नाज्यान सब्बा, वार्ड 22 की अंजु सिंह, वार्ड 23 के अवधेश सिंह, वार्ड 28 की अमृता श्रीवास्तव और वार्ड 30 के सुधीर चौधरी खुलकर उनके साथ नजर आए।

इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 2 की सुप्रिया महतो, वार्ड 10 के शंकर सरदार, वार्ड 31 के रिंकू राय, वार्ड 33 के श्याम हाईबुरू और वार्ड 34 की रीता देवी को लेकर रही। इन पार्षदों ने अंत तक अपने पत्ते नहीं खोले और इन्हीं के रुख ने जीत-हार का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम समय में लिए गए फैसलों और क्रॉस वोटिंग ने चुनाव को अप्रत्याशित बना दिया। यही वजह रही कि कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में अंकुर सिंह ने बाजी मार ली। यह चुनाव न सिर्फ नगर निगम की राजनीति में नई दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर हर एक वोट कितना अहम होता है।

20 पार्षदों के साथ डीसी कार्यालय पहुंची थी अर्चना

अर्चना सिंह के समर्थक चुनाव में अपनी जीत तय मान रहे थे। इनके समर्थक काफ़ी उत्साहित रहे। बताया जाता है की जश्न की तैयारी पहले ही हो चुकी थी। अर्चना सिंह  वोटिंग से पहले भी 20 पार्षद के साथ जिला समाहरणालय सभागार पहुंचे थे। लेकिन परिणाम उनके विपरीत  आया। जिसके बाद अर्चना के खेमे में मायूसी छा गया।

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