सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आज ‘विकसित भारत में आंचलिक पत्रकारिता’ विषय पर किया गया सेमिनार का आयोजन

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Jharkhand : सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आज ‘विकसित भारत में आंचलिक पत्रकारिता’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार में दैनिक जागरण के संपादक श्री यूएन पाठक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तथ्यों के आधार पर ही समाचार लेखन करें, जो सत्य पर आधारित हो. पत्रकारिता का उद्देश्य जनहित में कार्य करना होता है. आपके लेखन से किसी की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए और न ही किसी की मानहानि होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उद्देश्यपूर्ण कार्य करें और जनता की आवाज बनें. शासन और प्रशासन को भी विकास कार्यों की जिम्मेवारी गंभीरता से लेनी होगी. निष्पक्ष पत्रकारिता होगी तभी साख बचेगी और विश्वसनीयता कायम रहेगी. अब ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी शहरों जैसी विकास योजनाओं के लाभ की उम्मीद करने लगे हैं तो उनकी उम्मीदों पर भी खरा उतरना होगा. यूट्यूबर खबर बनाते समय एक पक्षीय बात न करें. सभी पक्षों से बात करने के बाद ही खबर बनायें. अपनी कलम से बदलाव लाने की इच्छा रखने वाले ही पत्रकारिता में करियर बना रहे हैं. श्री सिंह ने कहा कि आंचलिक पत्रकार सिर्फ रूटीन खबरें न देकर विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर भी रिपोर्टिंग करें और लगातार फॉलोअप देते रहें तभी असर दिखेगा.
आजाद मजदूर के संपादक श्री कवि कुमार ने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज है. आंचलिक पत्रकारिता नहीं होती तो देश का विकास नहीं हो पाता. आंचलिक पत्रकार कई चुनौतियों और खतरों का सामना करते हुए काम करते हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन द्वारा इन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराना चाहिए. इन्होंने जमशेदपुर में अखबारों के आगमन और पत्रकारिता के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा की. श्री कुमार ने आगे कहा कि प्रतिभा को सम्मान जरूर मिलता है लेकिन इसमें वक्त लगता है. इन्होंने कई खबरों का उदाहरण देते हुए बताया कि आंचलिक अखबारों ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जिसे बड़े अखबारों ने जगह नहीं दी या बाद में खबर प्रकाशित की. विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि अंतरात्मा की आवाज सुनेंगें तो गलत काम करने से बचेंगे. इन्होंने सोना देवी विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी के लिए अपनी दो पुस्तकें भी भेंट की.
इस सेमिनार में दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ राजेश सिंह ने कहा कि संकल्प लेकर ही आप इस क्षेत्र में विश्वसनीय बने रह सकते हैं. समय के साथ तकनीक ने कार्य को सुविधाजनक बना दिया है.
राष्ट संवाद के संपादक देवानन्द सिंह ने कहा कि आंचलिक पत्रकार होना सौभाग्य की बात है. लोग भाग्य से पत्रकार बन पाते हैं. इन्होंने विकास पत्रकारिता पर बल दिया और कहा कि पत्रकारों को समाज में उचित सम्मान देना चाहिए.
झारखंड न्यूज 24 के संपादक रवि प्रकाश ने व्यवहारिक बातें बताते हुए कहा कि किस तरह बड़ी घटनाओं के अपडेट लगातार आते रहते हैं और समाचार में उनको स्थान दिया जाता है.
दैनिक जागरण के ब्यूरोचीफ मंतोष मंडल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आंचलिक पत्रकारिता में पत्रकारों को जनता की आवाज बनना पड़ता है और उनका नेतृत्व भी करना पड़ता है. जनता की तकलीफ को समझ कर काम करेंगे तभी सफल स्टोरी लिख पायेंगे.
खबरमंत्र  के ब्यूरोचीफ सत्येंद्र ने कहा कि पत्रकारिता की पृष्ठभूमि को समझना होगा. चुनौतियों को जानना होगा. इन्होंने पी साई नाथ का हवाला देते हुए कहा कि भारत की असली कहानी गांव में है और आंचलिक पत्रकार इन कहानियों को सामने लाता है. चुनौतीपूर्ण करियर है अच्छा काम करना होगा.
ईस्पात मेल के संपादक जयप्रकाश राय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आना है तो अखबार के माध्यम से करियर की शुरूआत करें. पत्रकारिता को रोजगार का साधन न मानें.
सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने सम्मानित पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि झारखंड के पत्रकारों की गिनती भी आंचलिक पत्रकारों में ही की जाती है. पत्रकारों के सम्मान में कोई कमी न हो यह समाज को देखना चाहिए.
इस सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया. कुलपति डॉ ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने स्वागत भाषण दिया. स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष डॉ नीलमणि कुमार ने विषय प्रवेश कराया तथा कुलसचिव डॉ नित नयना ने धन्यवाद ज्ञापन किया. सहायक कुलसचिव श्रीमति अर्चना सिंह तथा स्कूल ऑफ जर्नलिज्म् की सहायक प्राध्यापक कुमारी निकिता ने मंच संचालन किया.

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