प्रिया कपूर की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय कपूर के मोबाइल की जब्ती को लेकर भेजा नोटिस


Mumbai: कपूर बनाम कपूर संपत्ति विवाद मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने संजय, प्रिया और वसीयत के डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल अन्य लोगों के मोबाइल डिवाइस जब्ती के मामले में ये नोटिस जारी किया है. दरअसल, हाईकोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार ने करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग वाली नई याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है. बता दें कि करिश्मा कपूर के बच्चों ने तत्काल सुनवाई की मांग की, क्योंकि कॉल डेटा रिकॉर्ड एक साल के भीतर डिलीट हो सकता है.अदालत ने वसीयत की फॉरेंसिक जांच के लिए भी 26 फरवरी की तारीख तय की है, यह देखते हुए कि रानी कपूर ने भी कथित वसीयत की फॉरेंसिक जांच के लिए इसी तरह का आवेदन दायर किया है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने रानी कपूर की वसीयत की फॉरेंसिक जांच की मांग वाली नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया है.

बता दें कि इससे पहले दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संजय की मां रानी कपूर की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से पहले जस्टिस विकास महाजन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था. ये याचिका 80 साल की रानी कपूर की ओर से दायर की गई थी. रानी ने बहू प्रिया और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ केस दर्ज किया था. उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि जिस फैमिली ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण किया जा रहा है, उसे अमान्य घोषित किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति और विरासत को गैरकानूनी तरीके से हथियाने के लिए किया गया है, जिसमें उनकी जानकारी और सहमति नहीं थी. प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों ने मिलकर गैरकानूनी तरीके से इस ट्रस्ट का गठन किया.बता दें कि इससे पहले दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संजय की मां रानी कपूर की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से पहले जस्टिस विकास महाजन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था. ये याचिका 80 साल की रानी कपूर की ओर से दायर की गई थी. रानी ने बहू प्रिया और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ केस दर्ज किया था. उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि जिस फैमिली ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण किया जा रहा है, उसे अमान्य घोषित किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति और विरासत को गैरकानूनी तरीके से हथियाने के लिए किया गया है, जिसमें उनकी जानकारी और सहमति नहीं थी.



