हरियाणा के जींद में 10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म,


हरियाणा : हरियाणा के जींद जिले से आई एक कहानी ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. 19 साल से शादीशुदा 37 साल की एक महिला ने 10 बेटियों के बाद आखिरकार एक बेटे को जन्म दिया है. यह डिलीवरी उचाना कस्बे के ओजस हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी होम में हुई. डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक हाई रिस्क केस था, लेकिन मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि महिला को तीन यूनिट खून चढ़ाना पड़ा, लेकिन महिला डिलीवरी के बाद वह अगले ही दिन फतेहाबाद जिले के अपने गांव लौट गई. हालांकि 11वें बच्चे को जन्म देने का यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच पर भी सवाल है जो आज भी बेटा पाने की चाहत को जिंदा रखे हुए है.हाल ही में सुनीता ने 11वीं संतान को जन्म दिया. इस बार परिवार को बेटे की सौगात मिली. खास बात यह रही कि सुनीता की यह 11वीं डिलीवरी भी पूरी तरह नॉर्मल हुई. संजय ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक प्राइवेट अस्पताल में करवाई, ताकि बेहतर इलाज मिल सके. जन्म के समय नवजात में खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत खून चढ़ाया. समय पर इलाज मिलने से बच्चे की हालत में सुधार हुआ. फिलहाल मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं. डॉक्टरों की देखरेख में कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद परिवार अब राहत की सांस ले रहा है.बेटे के जन्म से परिवार में उत्सव जैसा माहौल है. घर में मिठाइयां बांटी जा रही हैं और दूर-दराज के रिश्तेदार भी बधाई देने पहुंच रहे हैं. संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं. उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं. वह कहती हैं, भगवान ने मेरी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी. इतने सालों से मन में एक ही इच्छा थी कि घर में एक पोता हो. संजय के पिता कपूर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है. वह लोक निर्माण विभाग (PWD) में बेलदार के पद पर कार्यरत थे. पिता के जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारियां संजय के कंधों पर आ गईं. इसके बावजूद उन्होंने कभी हालात से समझौता नहीं किया.संजय की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है. उन्होंने बताया कि वह भी कभी लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर काम करते थे, लेकिन वर्ष 2018 में उन्हें काम से हटा दिया गया. इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण किया. पिछले एक साल से काम भी बंद है, जिससे वह फिलहाल बेरोजगार हैं.




