पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना, कहा- पेसा नियमावली आदिवासी मूल भावना से भटकी

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The Union Minister for Tribal Affairs & Agriculture and Farmers Welfare, Shri Arjun Munda addressing at the inauguration of the renovated building of Bharatiya Adim Jati Sewak Sangh (BAJASS) at Jhandewalan, in New Delhi on March 16, 2024.

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रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने हेमंत सोरेन नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने पेसा (PESA) कानून के वास्ते घोषित नियमावली को मूल भावना से भटका दिया है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि इससे आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों को नुकसान होगा। संसाधनों एवं प्रशासन पर अधिकार देना था। लेकिन वर्तमान शासन की बनाई गई नियमावली से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का रवैया संवेदनहीन है और यह आदिवासी पहचान की चारित्रिक भावना को दरकिनार करती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि नई नियमावली प्रशासन और अन्य संस्थाओं को अपनी मरजी से लागू करने का अधिकार देती है, जिससे कानून की आत्मा प्रभावित होती है। मुंडा ने कहा कि इससे भविष्य में सामाजिक और प्रशासनिक संकट पैदा हो सकता है, क्योंकि नियमावली नीति के पृष्ठों में भले विस्तृत दिखे, पर भावनात्मक रूप से वह शून्य है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 5वीं अनुसूची से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार कदम उठाने की आवश्यकता है, परंतु मौजूदा प्रशासन ऐसा नहीं कर रहा है। उनके अनुसार यह नियमावली कानून का गलत उपयोग और आदिवासी अधिकारों के प्रति सरकार की अनासक्ति को दर्शाती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पोलिटिकल खींचतान का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि पेसा कानून तथा आदिवासी हितों के मुद्दे झारखंड राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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