पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में 4 साल से ज्यादा देरी, लागत में 83% तक भारी बढ़ोतरी


भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में अब तक लगभग 4 साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है, जिससे इसके खर्च में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और कुल लागत अनुमान में करीब 83% की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

प्रारंभ में इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का खर्च लगभग ₹1.08 लाख करोड़ आंका गया था, लेकिन अब अनुमान है कि कुल लागत लगभग ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुँच सकती है। देरी की वजह से निर्माण और अन्य संबंधित खर्चों में इज़ाफा हुआ है।
मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण को अब अगस्त 2027 में शुरू करने की संभावना जताई जा रही है। पूरा मार्ग दिसंबर 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।
परियोजना में देरी के पीछे भूमि अधिग्रहण की मुश्किलें, अनुमति-प्रक्रियाओं में अड़चनें और तकनीकी चुनौतियाँ जैसी वजहें शामिल बताई जा रही हैं। परियोजना को तटस्थ और पर्यावरण के लिहाज़ से भी अहम माना जाता है, क्योंकि इससे सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि सारी बाधाओं और लागत वृद्धि के बावजूद ट्रेन सेवा पूरे रूट पर कब शुरू हो सकेगी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि काम जारी है और जितनी जल्दी संभव हो सके, परियोजना को पूरा करने की कोशिश जारी है।



