79 साल के नवीन पटनायक कैसे रोकेंगे बीजेपी का ‘ऑपरेशन लोटस’,

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भुवनेश्वर : विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजेडी) में पार्टी छोड़ने वालों की कतार लगी है। कई बड़े नेता पहले ही किनारा कर चुके हैं, अब जिला और ब्लॉक स्तर के नेता भी पार्टी छोड़ रहे हैं। बीजेडी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ऑपरेशन लोटस चला रही है। पंचायत चुनाव से पहले सरकार फंड रोककर जिलों में बीजू जनता दल के नेताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है। बीजेपी विधायक विभूति प्रधान का कहना है कि बीजेडी 2024 के चुनाव हारने के बाद से ही गंभीर संकट में है और पंचायत चुनावों के बाद उसका अस्तित्व मुश्किल हो जाएगा। माना जा रहा है कि नौपदा उपचुनाव में हार, नवीन पटनायक की बढ़ती उम्र और सेकेंड लाइन लीडरशिप की कमी के कारण बीजेडी को राजनीतिक तौर से कमजोर रहा है।अभी ओडिशा में दो बड़ी राजनीतिक घटनाएं हुईं। भद्रक जिले में बीजू जनता दल के नेता बीजेपी में चले गए। इसके अलावा तालचेर नगरपालिका के कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भगवा चोला पहन लिया। भद्रक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और तालचेर धर्मेंद्र प्रधान का गृह जिला है। बीजेडी में खलबली नौपदा उपचुनाव के नतीजों के बाद और बढ़ गई। इस उपचुनाव में बीजू जनता दल तीसरे स्थान पर खिसक गया, जबकि नवीन पटनायक ने स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी वहां दो बार प्रचार के लिए गए। यहां दूसरे स्थान पर कांग्रेस रही। बीजेडी का वोट शेयर 33 प्रतिशत से घटकर 18.07 रह गया। पार्टी में भगदड़ और चुनावी हार ने बीजेडी नेताओं की नींद उड़ा दी है। पार्टी के अंदरखाने में यह चर्चा हो रही है कि क्या पार्टी सिर्फ नवीन पटनायक के चेहरे के बलबूते टिकी रहेगी। उनका विकल्प कौन बनेगा? 79 वर्षीय नवीन पटनायक स्वास्थ्य कारणों से चुनावी मंचों से दूर रहते हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने उत्तराधिकारी का ऐलान नहीं किया। उन्होंने पार्टी को संभालने के लिए प्यारीमोहन मोहपात्रा और बाद में वी.के. पांडियन को पावरफुल किया, मगर पार्टी का बागडोर नहीं थमाया।2027 में ओडिशा में पंचायत चुनाव होने वाले हैं, जिसमें बीजेपी से ज्यादा बीजू जनता दल की अग्निपरीक्षा होगी। 2022 के पंचायत चुनाव में बीजू जनता दल ने 852 जिला परिषद में 766 पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी 42 और कांग्रेस 37 सीटों तक सीमित रही। अन्य दलों को सात सीटें मिली थी। इस तरह बीजेडी ने ओडिशा के सभी 30 जिला परिषदों में कब्जा किया था। एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर नवीन पटनायक अगले एक साल में अपना उत्तराधिकारी तय नहीं कर पाए तो बीजेडी के लिए मुश्किल बढ़ जाएगी।

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