जमशेदपुर के CSIR-National Metallurgical Laboratory ने 75 वर्षों की उत्कृष्टता का उत्सव मनाया

0
Advertisements

जमशेदपुर: जमशेदपुर स्थित CSIR-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ने स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी शोध-प्रगति, तकनीकी उपलब्धियों और सामाजिक योगदान का व्यापक पुनरावलोकन प्रस्तुत किया है।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements
https://bashisthaonline.in

यह प्रयोगशाला 1946 में स्थापित प्रस्तावित हुई थी और 1950 में औपचारिक रूप से परिचालन में आई थी। यह भारत में धातु, खनिज और सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में शुरुआती अग्रणी संस्थानों में से एक है।
वर्षों से इसने विभिन्न प्रकार की धातु निष्कर्षण, मिश्र धातुओं का विकास, उन्नत सामग्री विज्ञान, पर्यावरण-अनुकूल धातु उत्पादन एवं पुनर्चक्रण जैसी शोध-क्रियाओं को आगे बढ़ाया है।

इन 75 वर्षों में CSIR-NML ने निम्नलिखित बड़ी उपलब्धियाँ दर्ज की हैं :

लो ग्रेड खनिजों तथा कोयले से धातुओं की निष्कर्षण प्रक्रिया विकसित की गई।

मिश्र धातुओं एवं उन्नत सामग्री-प्रौद्योगिकी पर कार्य किया गया, जिससे विभिन्न उद्योगों में भारतीय स्तर पर आत्मनिर्भरता बढ़ी।

ई-अपशिष्ट (e-waste) तथा उद्योग-उपशिष्टों से धातुएँ पुनः प्राप्त करने तथा उपयुक्त उपयोग में लाने के लिए शोध-पेहल की गई।

स्कूली एवं कॉलेज-स्तर पर विज्ञान-प्रबुद्ध कार्यक्रम चलाए गए, जनसचेतना एवं कौशल विकास की दिशा में सामाजिक भूमिका निभाई गई।

प्रतिष्ठान ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में उनकी दिशा — “उद्योग-अन्वेषण-समाज” के तीन आयामों पर केंद्रित रहेगी। यानी, शोध को उद्योग-उपयुक्त बनाना, तकनीकी समाधान देना और समाज-हित में तकनीक को लागू करना।

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिकों, उद्योग-प्रतिनिधियों एवं शिक्षाविदों ने कार्यक्रम की उपलब्धियों व भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संस्था ने न केवल देश की स्टील व धातु-उद्योग को तकनीकी सहारा दिया, बल्कि उन चुनौतियों से भी निपटा जो धातु-उद्योग के पुनर्रचना, पर्यावरण नियंत्रण व नवाचार से जुड़ी थीं।

See also  संतरागाछी-खातीपुरा एक्सप्रेस की बुकिंग शुरू होते ही बढ़ी मांग, सेकेंड एसी में टिकट आरएसी तक पहुंचे

उद्घाटन सत्र में कहा गया कि आज के युग में जब “निर्माण भारत”, “हरित धातु उत्पादन” एवं “चक्रवाली अर्थव्यवस्था” जैसे विषय प्रमुख हैं, तब इस प्रयोगशाला का अनुभव व संसाधन और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति में उर्जा-कुशल धातु उत्पादन, अपशिष्ट कम करने वाले प्रक्रियाएँ, और उच्च प्रदर्शन सामग्री-विकास शामिल होंगे।

यह उपलब्धि न सिर्फ इस संस्थान के लिए बल्कि पूरे भारतीय धातु-विपणन व अनुसंधान क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।

About The Author

Thanks for your Feedback!

You may have missed