अवैध बंदी बनाए गए लोगों के लिए मुआवजे की मांग : जवाहरलाल शर्मा की याचिका शीर्ष अदालत में

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जमशेदपुर: नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है। इसके तहत जग गया है यह विचार कि गलत मामलों में लंबे समय तक जेल में रहने वाले लोगों को सिर्फ रिहा कर देना पर्याप्त नहीं — उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। इस याचिका के प्रवर्तक हैं जवाहरलाल शर्मा जो इस दिशा में न्यायपालिका से व्यापक रूप से प्रतिकारात्मक उपायों की मांग कर रहे हैं।

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शर्मा ने याचिका में कहा है कि कई लोगों को झूठे आरोपों या बिना पर्याप्त प्रमाण के जेल में रखा गया है। उनका कहना है कि ऐसे लोग अपने परिवार, सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन से जुड़े अवसरों से वंचित हो जाते हैं। इसलिए, न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप उन्हें पुनर्स्थापना और मुआवजे का अधिकार मिलना चाहिए।

इस मुद्दे पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्या वे ऐसे मामलों में मुआवजे की प्रक्रिया लागू करने पर विचार कर सकते हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या एक स्थायी कोष स्थापित किया जा सकता है, जिसमें अवैध रूप से बंदी बनाए गए लोगों को शीघ्रता से राहत दी जा सके।

याचिका में मुआवजे के दायरे, पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया, राशि का निर्धारण एवं भुगतान के तंत्र की रूपरेखा प्रस्तावित की गई है। यह प्रस्ताव अदालत को सौंपा गया है ताकि आगे की सुनवाई में इन बिंदुओं पर निर्देश दिए जा सकें।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस दिशा में ठोस व्यवस्था बनी, तो यह मानवाधिकार रक्षकों के दृष्टिकोण से एक मील का पत्थर साबित होगा। यह व्यवस्था न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति को भी रोकेगी।

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हालाँकि अभी तक यह तय नहीं कि मुआवजे की राशि कितनी होगी, किस समय तक भुगतान होगा तथा किन मामलों को इस तहत शामिल किया जाएगा। अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया है कि विधि का आधार स्पष्ट होना चाहिए ताकि कोई अति-वृद्धि या विवेकहीन निर्णय न हो सके।

जवाहरलाल शर्मा की यह पहल इसलिए विशेष है क्योंकि उन्होंने सिर्फ एक व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित न रहकर पूरे सिस्टम में सुधार की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने न्यायपालिका से यह आग्रह किया है कि ऐसी प्रक्रियाएँ जहाँ व्यक्ति की स्वतंत्रता क्षतिग्रस्त हुई हो, उन्हें गंभीरता से देखा जाए।

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