अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर ED रेड


नई दिल्ली: दिल्ली ब्लास्ट से जांच के घेरे में आई अल फलाह यूनिवर्सिटी के ओखला मुख्यालय और उससे जुड़े 25 ट्रस्टियों के ठिकानों पर मंगलवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने छापेमारी की. दिल्ली के साथ फरीदाबाद में भी कई स्थानों पर रेड डाली गई. अल फलाह यूनिवर्सिटी ही आतंकियों का अड्डा बनी हुई थी. जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने दिल्ली और फरीदाबाद में 25 स्थानों ये रेड की है. इसमें ओखला हेडक्वार्टर के साथ यूनिवर्सिटी से जुड़े ट्रस्टी की लोकेशन पर भी ईडी टीमें पहुंची हैं. दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट केस में एनआईए की जांच के साथ ईडी ने मनी लॉड्रिंग मामले की जांच के लिए एक केस दर्ज किया था. अल फलाह यूनिवर्सिटी के कामकाज में कई गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई है, जिसकी जांच में एजेंसियां जुटी हैं.
ईडी की टीम अल फलाह यूनिवर्सिटी भी पहुंची है और वहां भी दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं. मालूम हो कि दिल्ली लाल किले में बम धमाका करने वाले डॉ. उमर उन नबी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन और डॉ. आदिल अहमद इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे. कई अन्य डॉक्टर भी इसी नेटवर्क का हिस्सा था. छापेमारी के दौरान ED की टीम ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी से भी पूछताछ की, वह पिछले कुछ दिनों से लापता बताए जा रहे थे।जांच एजेंसियों की छापेमारी में पता चला है कि ग्रुप से जुड़ी 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड हैं। जब अधिकारी वहां पहुंचे तो पाया कि ऑफिस में न कोई स्टाफ मौजूद था और न ही बिजली-पानी का कोई इस्तेमाल दिखा। इससे साफ लगता है कि इन कंपनियों की जमीन पर मौजूदगी सिर्फ कागज़ों में ही है।जांच में यह भी सामने आया कि कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल का इस्तेमाल किया गया है। EPFO और ESIC में भी इन कंपनियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जबकि कागज़ों में इन्हें बड़े कारोबार वाली कंपनियाँ बताया गया था। इससे इन कंपनियों की गतिविधियों पर और ज्यादा शक गहरा गया है।
अधिकारियों ने पाया कि कई कंपनियों में एक ही डायरेक्टर, एक ही साइनैटरी और लगभग एक जैसे KYC डॉक्यूमेंट हैं। बैंक खातों से भी केवल नाम मात्र का वेतन भुगतान दिखा, जबकि HR से जुड़े रिकॉर्ड लगभग नहीं के बराबर मिले। कंपनियों की स्थापना की टाइमलाइन भी एक जैसी निकली, जो इसे और संदिग्ध बनाती है।
इसी दौरान जांच टीम ने ग्रुप द्वारा UGC और NAAC मान्यता को लेकर किए गए दावों में भी शुरुआती गड़बड़ियाँ पकड़ी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसी अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।जांच एजेंसियों का कहना है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी लालकिला ब्लास्ट केस का एपिसेंटर बनकर सामने आई है। माना जा रहा है कि 14 लोगों की जान लेने वाले इस हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट की प्लानिंग इसी यूनिवर्सिटी कैंपस में की गई थी। एजेंसियां अब जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत फॉरेंसिक जांच करेंगी।




