“हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां नेगेटिविटी…” — गौतम अडानी ने क्यों कही यह बात?


नई दिल्ली: “हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां नेगेटिविटी तेजी से फैलती है, और पॉजिटिविटी को नजरअंदाज कर दिया जाता है…” — यह शब्द भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार गौतम अडानी के हैं, जो उन्होंने हाल ही में एक बिजनेस समिट में कहे। अडानी का यह बयान सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि मौजूदा सामाजिक और मीडिया माहौल पर एक तीखा संकेत था।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से अडानी समूह लगातार विवादों में रहा है — कभी शेयर मार्केट को लेकर, तो कभी राजनीतिक समीकरणों को लेकर। मीडिया और सोशल मीडिया पर अडानी समूह के खिलाफ नेगेटिव खबरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
लेकिन इसी बीच अडानी ने एक मंच से बोलते हुए स्पष्ट किया कि “आज अगर कोई अच्छा काम भी करता है, तो उसकी चर्चा उतनी नहीं होती, जितनी अफवाहों और आलोचनाओं की होती है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अडानी ग्रुप देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट, एयरपोर्ट, एनर्जी और डेटा सेक्टर में जो निर्माण कर रहा है, उसका असर आम आदमी की जिंदगी में प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है — फिर भी मीडिया का फोकस विवादों पर ज्यादा होता है।
अडानी का यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा नहीं दर्शाता, बल्कि यह पूरे कारोबारी वर्ग, इनोवेटर्स और देश के निर्माण में लगे लोगों की उस मानसिक स्थिति को सामने लाता है जहां “ट्रायल बाय मीडिया” और सोशल मीडिया पर एकतरफा आलोचना आम हो चुकी है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नेगेटिविटी के बजाय समाधान, निर्माण और प्रगति पर ध्यान दें।
अडानी की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब भारत वैश्विक स्तर पर आर्थिक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उनकी यह सोच बताती है कि अब उद्योगपति भी केवल आंकड़ों और मुनाफे से नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बात कर रहे हैं।




