चैत महीने में गाए जाने वाले गीत चैता, चैती या चैतावर का होने लगा आयोजन……

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नोखा /रोहतास (अभय कुमार मिश्रा ):-हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक चैत माह को वर्ष का पहला महीना माना गया है। इस महीने का यूं तो कई महत्व है परंतु इस महीने में बिहार में गाए जाने वाले गीत ‘चैता’ का अपना अलग महत्व है। इस महीने में राज्य के गांव से लेकर शहरों तक में चैता का आयोजन किया जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में चैत महीने में गाए जाने वाले गीत को चैता, चैती या चैतावर कहा जाता है। इन गीतों में मुख्य रूप से इस महीने का वर्णन होता है। भोजपुर के चैता गायक रमेश कुमार ने बताया कि चैता ‘दीपचंदी’ या ‘रागताल’ में अक्सर गाया जाता है। हालांकि कई गायक इसे ‘सितारवानी’ या ‘जलद त्रिताल’ में भी गाते हैं। वह मानते हैं कि आधुनिक समय में यह परंपरा अब समाप्त हो रही है परंतु आज भी भोजपुर, औरंगाबाद, बक्सर, रोहतास और गया जैसे जिलों में चैता की महफिल जमती है। वह कहते हैं कि चैता पर ढेर सारे विद्वानों ने अपने आलेख लिखे हैं जिसमें चैती गीतों को संग्रह होता है। कुमार कहते हैं कि चैता गीत को बिहार में ही कई नामों से जाना जाता है। चैता गीत को भोजपुरी में घाटो, मगही में चैतार और मैथिली में चैतावर कहा जाता है। चैत महीने में ऋतु परिवर्तन के रूप में जाना जाता है। पतझड़ बीत चुका होता है और वृक्षों और लता में नई-नई कोपलें आ जाती हैं। एक अन्य चैता गायक प्रफुल बसंत कहते हैं कि चैत महीने में राम का जन्मोत्सव होने के कारण राम का वर्णन चैता गीतों में तो आता ही है परंतु कई गीतों में कृष्ण और राधा के विरह का भी जिक्र है। इन गीतों में शिव पार्वती के भी संवाद कर्णप्रिय लगते हैं। “शिव बाबा गइले उतरी बनिजिआ, लेइ अइले, भंगिया धतुरवा हो रामा ” काफी प्रचलित चैता गीत माना जाता है। वह कहते हैं कि राज्य में चैता गीत को लेकर गांवों में प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है जबकि दो गोला भी कई स्थानों पर आयोजित किया जाता है।

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वही रोहतस के भटौली  गाँव के संतोष राय के दरवाजा पर चैता का आयोजन किया गया। जिसमे ब्यास सुरेश राय, ललीत राय, करुण राय, धनबाबू राय, बहादुर पासवान, अनिल पासवान, भानु शर्मा, दिनानाथ राय एवम सभी भटौली ग्रामीण मौके पर मौजूद थे।

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