आदित्यपुर में जनता का ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’! कई पुराने किले ढहे, आदित्यपुर में बदलाव की लहर…


आदित्यपुर:- आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में आदित्यपुर की जनता ने इस बार ऐसा जनादेश दिया है, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। बड़े-बड़े दिग्गज, जो खुद को अजेय मानकर मैदान में उतरे थे, उन्हें मतदाताओं ने ऐसा सबक सिखाया कि सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। जो चले थे “छब्बे” बनने, जनता ने उन्हें “दुबे” बनाकर घर बैठा दिया।
अगर बात करें आदित्यपुर नगर परिषद से लेकर नगर निगम बनने तक के सियासी इतिहास की, तो श्रीवास्तव परिवार का दबदबा लंबे समय तक कायम रहा। कभी चेयरमैन, तो कभी वाइस चेयरमैन, तो कभी मेयर—इस परिवार की पकड़ लगातार बनी रही। इसी परिवार से आदित्यपुर की पहली महिला चेयरमैन रहीं रीता श्रीवास्तव को इस बार वार्ड 29 की जनता ने करारा झटका दिया। जनता ने उन्हें ऐसा नकारा कि सियासत के इस मजबूत किले की दीवारें हिल गईं। वार्ड 29 के मतदाताओं ने साफ कर दिया कि अब बदलाव की बयार चल चुकी है।
अब बात करें नगर परिषद के पहले वाइस चेयरमैन रहे पुरेन्द्र नारायण सिंह की। इस बार आदित्यपुर की जनता ने न सिर्फ उन्हें, बल्कि उनके परिवार के दूसरे सदस्य को भी पार्षद बनने का मौका नहीं दिया। मतदाताओं ने परिवारवाद की राजनीति पर स्पष्ट संदेश देते हुए उन्हें घर बैठने का जनादेश थमा दिया। यह परिणाम उन लोगों के लिए भी संकेत है, जो पुराने प्रभाव के भरोसे चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं।
इसी कड़ी में पूर्व डिप्टी मेयर अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह का नाम भी शामिल है। 2018 के चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीत दर्ज करने वाले बॉबी सिंह को इस बार वार्ड 17 की जनता ने हार का स्वाद चखा दिया। पिछली जीत का रिकॉर्ड इस बार काम नहीं आया और मतदाताओं ने साफ कर दिया कि हर चुनाव में नई परीक्षा देनी होती है। वार्ड 17 का फैसला बताता है कि जनता अब पुराने प्रदर्शन की बजाय मौजूदा अपेक्षाओं के आधार पर वोट दे रही है।
गौरतलब है कि रीता श्रीवास्तव, पुरेन्द्र नारायण सिंह और अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह—तीनों ने अपने-अपने गृह वार्ड को छोड़कर दूसरे वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ना पसंद किया था, ताकि डिप्टी मेयर की दौड़ में खुद को आगे रख सकें। लेकिन जनता ने इस रणनीति को सिरे से नकार दिया। मतदाताओं ने साफ कर दिया कि बाहरी समीकरणों से ज्यादा महत्व स्थानीय जुड़ाव और विश्वास को दिया जाएगा।
इसी तरह पूर्व पार्षद अंबुज कुमार ने भी डिप्टी मेयर बनने की चाह में वार्ड 17 से किस्मत आजमाई। लेकिन यहां की जनता ने उन्हें भी नकारते हुए हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया। यह परिणाम बताता है कि इस बार आदित्यपुर में मतदाता पूरी तरह सजग और निर्णायक मूड में थे।
कुल मिलाकर आदित्यपुर नगर निगम चुनाव ने एक बात स्पष्ट कर दी है—यहां अब नाम और परिवार से ज्यादा काम और भरोसे की राजनीति चलेगी। जनता ने अपने वोट की ताकत का अहसास कराते हुए दिग्गजों को आईना दिखा दिया है। सियासत के इस बदले हुए मिजाज ने आने वाले समय के लिए भी एक साफ संकेत दे दिया है कि अब हर प्रत्याशी को जनता की कसौटी पर खरा उतरना ही होगा, वरना परिणाम सबके सामने है।




