अखिल भारतीय हड़ताल में उतरे सेल्स प्रतिनिधि, लेबर कोड के विरोध में बुलंद हुई आवाज


जमशेदपुर/रांची: बिहार झारखंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन (BSSRU) ने 12 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की कॉर्पोरेट परस्त एवं मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे। यूनियन के आह्वान पर जिले के करीब 800 मेडिकल व सेल्स प्रतिनिधियों ने एक दिवसीय हड़ताल में भाग लेते हुए जुबली पार्क स्थित ऑफिस गेट पर धरना दिया। इस आंदोलन में BSSRU के साथ-साथ FMRAI, AITUC और CITU से जुड़े संगठन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए और एकजुटता का परिचय दिया।
यूनियन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट और वित्तीय पूंजी के दबाव में 29 मौजूदा श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इससे 1976 में बना सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज (सेवा शर्त) अधिनियम अप्रभावी हो गया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद हासिल श्रम कानून को 2026 में 50 वर्ष पूरे होने से पहले ही कमजोर कर दिया गया है, जिससे मेडिकल व सेल्स प्रतिनिधियों के अधिकारों पर संकट गहरा गया है।
वक्ताओं ने कहा कि वेज कोड के तहत न तो न्यूनतम मजदूरी की स्पष्ट परिभाषा है और न ही निर्धारण का पारदर्शी फॉर्मूला। फ्लोर वेज बेहद कम प्रस्तावित है, जिससे कर्मचारियों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कंपनियां पहले जहां 8 घंटे कार्य लेती थीं, वहीं अब 10 से 12 घंटे काम कराया जा रहा है। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट के प्रावधान से नौकरी की सुरक्षा खत्म होने का खतरा है और सेवा नवीनीकरण की कोई गारंटी नहीं रहेगी। साथ ही आईआर कोड के तहत यूनियन बनाने और हड़ताल करने के मौलिक अधिकार को भी सीमित करने की आशंका जताई गई।
देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों और औद्योगिक फेडरेशनों द्वारा लंबे समय से इन प्रावधानों का विरोध किया जा रहा है। FMRAI, AITUC और CITU के प्रतिनिधियों ने भी धरना स्थल से श्रमिक एकता का आह्वान करते हुए कहा कि मजदूर हितों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धरना स्थल से सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज एक्ट को हर हाल में सुरक्षित रखने, वैधानिक कार्य प्रणाली लागू करने तथा अस्पताल और फील्ड में कार्यरत प्रतिनिधियों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग उठी। राज्य सरकार से 26,910 रुपये न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे कार्य दिवस लागू करने की भी मांग की गई। साथ ही कंपनी मालिकों द्वारा की जा रही गैरकानूनी निगरानी और ट्रैकिंग पर रोक लगाने की मांग की गई।
बीएसएसआरयू के जिला अध्यक्ष यशवंत देव माली ने कहा कि मजदूर विरोधी नीतियों का देशव्यापी स्तर पर विरोध जारी रहेगा। राज्य सचिव पीयूष गुप्ता ने संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। जिला सचिव विनय कुमार ने स्पष्ट कहा कि चारों श्रम संहिताएं किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं। प्रदर्शन के बाद उपायुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार के श्रम मंत्री को ज्ञापन भेजा गया और लेबर कोड की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर हितों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।




