पाकिस्तान में तक्षशिला के पास से मिले दुर्लभ सिक्के और सजावटी पत्थर


इस्लामाबाद: पाकिस्तानी पुरातत्वविदों को ऐतिहासिक शहर तक्षशिला के पास यूनेस्को-सूचीबद्ध स्थल की खुदाई के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और सिक्के मिले हैं। सिक्के और अन्य वस्तुओं के मिलने से प्राचीन सभ्यता की शहरी बस्ती के प्रमाण मिले हैं। ये खोजें प्राचीन भीर टीले पर की गई हैं। यहां से विशेषज्ञों को छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी ईस्वी के सिक्के मिले हैं.खुदाई में विशेषज्ञों को छठी शताब्दी ईसा पूर्व के कीमती सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी ईस्वी के सिक्के मिले हैं। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने इसे बीते एक दशक में इस स्थल पर हुई सबसे महत्वपूर्ण खोज बताया है।फोरेंसिक जांच और पेशावर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि इन सिक्कों पर कुषाण सम्राट वासुदेव की छवि अंकित है। इतिहासकारों के अनुसार वासुदेव कुषाण साम्राज्य के अंतिम महान शासकों में से एक थे। सिक्कों के एक तरफ सम्राट वासुदेव और दूसरी तरफ देवी की आकृति बनी हुई है, जो उस दौर के धार्मिक बहुलवाद को दर्शाती है।सभी कलाकृतियां खुदाई स्थल की B-2 खाई से मिली हैं, जो तक्षशिला में खोदी जा रही 16 खाइयों में से एक है। आसपास के अवशेषों से संकेत मिलता है कि यह इलाका कभी आवासीय क्षेत्र रहा होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि कुषाण काल, खासकर पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच, तक्षशिला राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अपने चरम पर था।कनिष्क जैसे शक्तिशाली कुषाण शासकों के संरक्षण में तक्षशिला एक बड़ा प्रशासनिक, व्यापारिक और बौद्धिक केंद्र बना। इसी काल में बौद्ध धर्म को बढ़ावा मिला और स्तूपों, मठों व धार्मिक परिसरों का निर्माण हुआ। गांधार कला का विकास भी इसी दौर में हुआ, जिसमें ग्रीक, रोमन, फारसी और भारतीय शैलियों का अनोखा संगम देखने को मिलता है।विशेषज्ञों का कहना है कि तक्षशिला से Lapis Lazuli का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह शहर दूर-दराज़ के इलाकों से व्यापारिक रूप से जुड़ा हुआ था। खासतौर पर अफगानिस्तान के बदख्शां क्षेत्र से, जो प्राचीन काल में इस पत्थर का प्रमुख स्रोत था।




