कोटक महिंद्रा बैंक में पीवीएस एजेंसी बदली, गार्ड्स की ज़िंदगी उजड़ी, त्यौहार की खुशियों पर संकट का साया…

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प्रतीकात्मक तस्वीर

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जमशेदपुर :- शहर में त्यौहारों की रौनक बढ़ने लगी है लेकिन इसी बीच सिक्योरिटी गार्ड्स और उनके परिवारों पर बेरोज़गारी का काला साया मंडरा रहा है। लंबे समय से कोटक महिंद्रा बैंक की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही पीवीएस सिक्योरिटी एजेंसी को अचानक बदल दिया गया है। नई एजेंसी के आने के बाद वर्षों से बैंक की चौखट पर डटे गार्ड्स को 14 सितंबर के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

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सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन मेहनतकश कर्मचारियों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा। जिन गार्ड्स ने दिन-रात निष्ठा और ईमानदारी से बैंक की सुरक्षा की, जिनकी चौकसी पर ग्राहकों का भरोसा टिका रहा, वे आज एक झटके में बेरोज़गार कर दिए गए। नई एजेंसी का साफ कहना है कि पुराने कर्मचारियों को रखने का इरादा नहीं है और बैंक की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

त्यौहार के इस मौसम में जब हर परिवार खुशियों की तैयारी करता है, तब इन गार्ड्स के घरों में चिंता और बेचैनी पसर गई है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का चूल्हा जलाने तक सब पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गार्ड्स का आरोप है कि बैंक और एजेंसी दोनों ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

अब सवाल लाजिमी है—क्या बैंक केवल एजेंसी बदलकर अपने कर्तव्य से मुक्त हो सकता है, क्या एजेंसी को वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी गार्ड्स को बेरहमी से बाहर करने का अधिकार है और क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह ऐसे संवेदनशील हालात में हस्तक्षेप कर गार्ड्स और उनके परिवारों को राहत दिलाए।

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यह मामला केवल दर्जनों सिक्योरिटी गार्ड्स की नौकरी का नहीं बल्कि उनके पूरे परिवारों की रोटी-रोज़ी और भविष्य का है। अगर बैंक और एजेंसी दोनों ही चुप्पी साधे बैठे हैं तो आम लोग यह पूछने पर मजबूर होंगे कि आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

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