जमशेदपुर को भिखारी मुक्त शहर बनाने की तैयारी शुरू, इंदौर बन चुका है पहला शहर…


Saraikela : जमशेदपुर को अब तक ग्रीन सिटी, क्लीन सिटी और स्टील सिटी के रूप में पहचान मिली है, जल्द ही इसे भिखारी मुक्त सिटी कहा जाएगा. जिसके बनने की दिशा में कदम आगे बढ़ चुका है. जिला प्रशासन ऐसी व्यापक व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत शहर की मुख्य सड़कों को भिखारियों से मुक्त किया जाएगा और उन्हें सुरक्षा, सम्मान व पुनर्वास की नई राह प्रदान की जाएगी. इस अभियान का संचालन गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से किया जाएगा. सबसे पहले विभिन्न स्थानों पर भिखारियों का सर्वे किया जाएगा, उनकी पहचान सुनिश्चित की जाएगी और फिर उन्हें सड़कों से हटाकर पुनर्वास केंद्रों में रखा जाएगा. यहां उन्हें प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे भीख मांगने की प्रवृत्ति छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकें. इसके लिए 50 बेड का एक पुनर्वास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जिसके संचालन हेतु 48.70 लाख रुपये का वार्षिक बजट तय किया गया है. यह योजना “स्माइल” नामक केंद्रीय योजना के तहत लागू की जाएगी. वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा. इस प्रकार की पहल 2025 में मध्य प्रदेश के इंदौर में हो चुका है. जिसने खुद को देश का पहला भिखारी मुक्त शहर घोषित किया है. वहां प्रशासन ने बड़े स्तर पर भिखारियों का पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और दंडात्मक प्रावधानों के जरिए अभियान को सफल बनाया. इंदौर में दान देने और भीख मांगने दोनों पर जुर्माना और एफआईआर का प्रावधान है. साथ ही सूचना देने वालों को 1000 रुपये इनाम दिया जाता है. इस पहल के तहत लगभग 5000 भिखारियों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है.
जमशेदपुर में इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. 27 दिसंबर को दोपहर 12 बजे तक तकनीकी और वित्तीय बिड जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कार्यालय में जमा करनी होगी जबकि उसी दिन शाम 3 बजे निविदा को खोला जाएगा. निविदा में शामिल होने के लिए एनजीओ का दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है. इसके अलावा भिखारी पुनर्वास, सर्वेक्षण और संचालन से संबंधित कम से कम दो वर्षों का अनुभव, परियोजना स्थल की उपलब्धता, कर्मचारियों का विवरण, और यदि संस्था को कोई सम्मान प्राप्त हुआ हो तो उसके प्रमाणपत्र व समाचार कटिंग भी प्रस्तुत करने होंगे.
जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस योजना के माध्यम से न सिर्फ भिखारियों को सड़कों से हटाया जाएगा, बल्कि उन्हें गरिमापूर्ण जीवन और रोजगार का अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में लाया जा सकेगा.




