389 लोगों का एक ही बाप, दूसरे की 310 संतानें,बंगाल में SIR ने खोला ऐसा खेल


पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची सत्यापन (SIR) अभियान के दौरान ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिन्होंने न सिर्फ चुनाव आयोग बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी हैरान कर दिया है. चुनाव आयोग की तरफ से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्य की कई विधानसभा सीटों पर सैकड़ों मतदाताओं ने एक ही व्यक्ति को अपना पिता दर्ज कर रखा है.सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस तरह की गलत जानकारियों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी तार्किक विसंगति की श्रेणी में रखा गया है, जिनमें सुधार जरूरी है. उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं और सही रिकॉर्ड दर्ज कराने की जिम्मेदारी मतदाताओं की ही है.आयोग ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में छह या उससे अधिक मतदाता एक ही व्यक्ति से माता-पिता के रूप में जुड़े पाए गए हैं, उन्हें अधिक गंभीरता से परखा जा रहा है. निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी कर यह सत्यापित कर रहे हैं कि कहीं फर्जी या गलत मैपिंग तो नहीं की गई है.इसके अलावा लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तहत नोटिस जारी करने के चार और आधार भी सामने आए हैं. इनमें 2025 की मतदाता सूची में दर्ज नाम का 2002 की SIR सूची से मेल न खाना, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम का अंतर होना, उम्र का अंतर 50 साल से ज्यादा होना, या मतदाता और उसके दादा-दादी की उम्र में 40 साल से कम का अंतर होना शामिल है.




