सोना देवी विश्वविद्यालय में मनाया गया नेशनल साइंस डे, कुलपति डॉ ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने कहा कि वैज्ञानिक सोच के साथ भविष्य की योजना बनाकर कार्य करें

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JHARKHAND: सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आज नेशनल साइंस डे मनाया गया. साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ फार्मेसी तथा स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के विद्यार्थियों ने अपने अपने मॉडल को प्रस्तुत किया. इन्होंने एक मॉडल तालाब की परिकल्पना की है जिसमें उन्होंने वैज्ञानिक सोच और नवाचार का प्रदर्शन किया. छात्रा कृतिका ने कार्यक्रम में बताया कि इस तालाब का उपयोग कृषि के क्षेत्र में सतत विकास, फार्मेसी का योगदान, भविष्य तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित मॉडल का प्रदर्शन नवाचार के रूप में किया.
स्कूल ऑफ एग्रीकल्चल साइंस की छात्रा कृतिका ने बताया कि एग्रीकल्चर साइंस के विद्यार्थियों ने मॉडल तालाब ‘विज्ञान जल वाटिका’ में एक वेस्ट वाटर टीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट तैयार किया. इसमें जल संरक्षण, वेस्ट वाटर टीटमेंट प्लांट, कृषि हेतु सिंचाई तथा जलीय जैव विविधता को दिखाया गया है.
एसडीयू स्कूल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों ने पावर प्वाइंट के माध्यम से बताया कि उनका वाटर फिल्टरेशन सिस्टम किस तरह कार्य करता है और तालाब से कचरा तथा अपशिष्ट को बाहर निकालने का कार्य करता है. उन्होंने इसके रोबोटिक तकनीक को भी बताया.
बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा सुप्रीति घोष ने बताया कि किस तरह यह तालाब बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उपयोगी हो सकता है. इन्होंने एल्गी कल्टीवेशन तथा एक्वाकल्चर के बारे में भी बताया. बायो फर्टीलाइजर तथा आर्गेनिक वेस्ट उत्पादन की जानकारी दी तथा कहा कि इससे ग्रीन टेक्नोलॉजी तथा वाटर कंजर्वेशन को बढावा मिलेगा. प्रजेंटेशन के माध्यम से एसडीयू स्कूल ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थियों ने बताया कि किस तरह इस तालाब से माइक्रो एल्गी प्राप्त कर माइक्रो एल्गी का इस्तेमाल कर किस तरह हेल्थ प्रोडक्ट बनाया जा सकता है.
कुलसचिव डॉ नित नयना ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विज्ञान वैज्ञानिक चिंतन को बढावा देता है. विद्यार्थी वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में कार्य करें.
सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने नेशनल साइंस डे मनाने के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिक खोज का ही परिणाम रहा है कि अब खान और औद्योगिक दुर्धटनाओं में भारी कमी आई है. कुलपति महोदय ने विद्यार्थियों को एयर क्वालिटि इंडेक्स मापने के लिए सेंसर विकसित करने का सुझाव दिया. कुलपति महोदय ने इंटरडिसिप्लीनरी वर्क करने का सुझाव दिया तथा कहा कि भविष्य के लिए योजना बनाकर वैज्ञानिक सोच के साथ काम करें.

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