असम के कोकराझार में संथाल आदिवासी समुदाय पर हुई हिंसा के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, मुआवजा और एसटी दर्जे की मांग


असम : असम के कोकराझार जिले में संथाल आदिवासी समुदाय के खिलाफ हाल की हुई हिंसा और आगजनी के मद्देनजर, बिहार– झारखंड–ओडिशा के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में पीड़ित परिवारों को तत्काल 15-15 लाख रुपये का मुआवजा देने तथा उनकी पूरी पुनर्वास व्यवस्था करने की मांग की गई है।

माहाल माझी पारगना माहाल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि 19 और 20 जनवरी को कोकराझार के गौरीनगर और करीगांव में सोहराय उत्सव के दौरान एक सड़क दुर्घटना से फैली अफवाह के चलते आदिवासी बस्तियों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में भी उपद्रवियों ने लगभग 40 घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पीड़ितों का राशन, कपड़े, दस्तावेज़ और मवेशी नष्ट हो गए।
ज्ञापन में यह भी जोर दिया गया है कि असम में लंबे समय से रहने वाले संथाल, हो, मुंडा और उरांव जैसी आदिवासी समुदायों को अभी तक अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा नहीं मिला है। इस वजह से वे सामाजिक और सरकारी सुरक्षा और अधिकारों से वंचित हैं, जिस कारण हिंसा और भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल ने निर्दोष लोगों की रिहाई, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा योजना बनाने की भी अपील की है।
विशेष रूप से ज्ञापन में यह कहा गया है कि इन समुदायों को संविधान के अनुरूप अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें सरकारी लाभ, भूमि अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएँ मिल सकें। इससे हिंसा और अत्याचार जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।



