मतदान से पहले ही मेयर! मानगो में सोशल मीडिया पर ‘सुधा गुप्ता’ की स्वघोषित ताजपोशी, नियम-कानून ताक पर

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जमशेदपुर:- मानगो नगर निगम चुनाव की सरगर्मी तेज होने से पहले ही सियासी हलकों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री रहे बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, मानो वे चुनाव जीत चुकी हों। सोशल मीडिया फेसबुक के प्लेटफॉर्म पर “मेयर सुधा सेना” के नाम से संचालित पेज ने चर्चा के साथ-साथ सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार में सुधा गुप्ता को सीधे तौर पर “मेयर” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम चुनाव अभी होने बाकी हैं। चुनावी नियमों के जानकारों का कहना है कि किसी भी भावी उम्मीदवार द्वारा चुनाव से पहले खुद को निर्वाचित पद के नाम से प्रचारित करना न केवल भ्रामक है, बल्कि यह चुनाव के नियमों के भी खिलाफ है। नियमों के अनुसार इस स्तर पर “मेयर प्रत्याशी” या “भावी मेयर उम्मीदवार” जैसे शब्दों का प्रयोग ही उचित और वैध माना जाता है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सोशल मीडिया के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मानो मुकाबला पहले ही तय हो चुका हो। जानकार मानते हैं कि इस तरह का प्रचार आम मतदाताओं को प्रभावित और भ्रमित कर सकता है, इसी वजह से चुनाव आयोग प्रचार की भाषा और प्रतीकों को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात करता रहा है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि “मेयर सुधा सेना” नामक पेज आधिकारिक रूप से किसके निर्देश पर संचालित हो रहा है या यह समर्थकों की अपनी पहल है। लेकिन इतना जरूर है कि चुनाव से पहले इस तरह की स्वघोषित उपाधि ने राजनीतिक मर्यादाओं और नियम-कानून पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चुनाव आयोग या प्रशासन इस मामले पर संज्ञान लेता है या नहीं। मानगो की राजनीति में यह साफ हो चुका है कि चुनावी रण शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर कुर्सी की लड़ाई तेज हो चुकी है।

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