कैरव गांधी अपहरण कांड: 13 दिन बाद सकुशल वापसी, पुलिस दबाव या फिरौती – सवाल बरकरार


जमशेदपुर: शहर के युवा उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी की 13 दिनों बाद सकुशल घर वापसी ने पूरे जमशेदपुर को राहत दी है, लेकिन इस अपहरण कांड को लेकर कई सवाल अब भी चर्चा में हैं। पुलिस के अनुसार लगातार दबिश, तकनीकी निगरानी और बढ़ते दबाव के कारण अपहरणकर्ता कैरव गांधी को छोड़कर फरार हो गए, जबकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि कैरव की रिहाई के लिए करोड़ों रुपये की फिरौती दी गई। पुलिस ने हालांकि फिरौती की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसे जांच का विषय बताया है।
लेकिन सूत्रो ने बताया कि अपहरण के बाद पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेष टीमें गठित कीं, संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई और अपहरणकर्ताओं की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। इसी दौरान पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली कि बढ़ते दबाव के कारण अपहरणकर्ता कैरव गांधी को किसी अन्य स्थान पर ले जाने की योजना बना रहे हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संभावित रास्तों पर घेराबंदी की। पुलिस दबाव और पकड़े जाने की आशंका के चलते अपहरणकर्ता कैरव को छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बरामद कर परिजनों तक पहुंचाया।
वहीं दूसरी ओर, शहर के व्यवसायिक और सामाजिक हलकों में दबे जुबान यह चर्चा भी है कि कैरव गांधी की सुरक्षित वापसी के पीछे फिरौती की भूमिका रही है और रकम तीन से पांच करोड़ रुपये तक होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि कैरव गांधी का परिवार इस विषय पर कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
कैरव गांधी की सकुशल वापसी के बाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता की सराहना हो रही है, वहीं यह मामला एक बार फिर जमशेदपुर जैसे शांत शहर में बढ़ते अपराध और उद्यमियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि अपहरण कांड में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है और दोषियों को जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।




