झारखंड मंत्री इरफान अंसारी के बयान पर विवाद, चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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झारखंड: झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिए गए अपने बयान को लेकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा था कि यदि किसी बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदान सूची को लेकर आपके इलाके में आए तो उसे घर के अंदर बंद कर दें। इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।

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भाजपा ने इस बयान को ‘गंभीर और अस्वीकार्य’ करार देते हुए सवाल उठाया है कि क्या ऐसे बयान राज्य में अराजकता को बढ़ावा देते हैं। भाजपा नेताओं ने कहा है कि मंत्री इस तरह का बयान सार्वजनिक तौर पर नहीं दे सकते क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।

वहीं मंत्री ने बाद में सफाई देते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या संवैधानिक पदाधिकारी को हथियार के रूप में देखना नहीं था, बल्कि उनका आशय था कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ नकली बीएलओ द्वारा भय फैलाने और नाम काटने की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मूलता में उन संदिग्ध लोगों के प्रति सचेत रहने की बात कही थी, न कि संवैधानिक अधिकारी को बंद करने की।

चुनाव आयोग ने इस पूरे प्रकरण पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने ध्यान दिलाया है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। इस प्रक्रिया को राजनीतिक मोड़ के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

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राजनीति में इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है और कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस तरह के बयानों का चुनावी असर देखने को मिल सकता है।

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