भारत के खिलाफ फिदायीन दस्ता तैयार करने में जुटा है जैश-ए-मोहम्मद


दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल ही में कार ब्लास्ट मामले की जांच लगातार जारी है। इस घटना के बाद बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद भारत के खिलाफ ‘फिदायीन दस्ता’ तैयार करने में जुटा हुआ है। इसके लिए फंडिंग भी जुटाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, डिजिटल हवाला से फंडिंग का खुलासा हुआ है।दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में जांच कर रही एजेंसियों को बड़े सुराग हाथ लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद भारत के खिलाफ फिदायीन दस्ता तैयार करने के लिए तेजी से फंड इकट्ठा कर रहा है। जांच के दौरान एजेंसियों को डिजिटल हवाला से जुड़े सबूत हाथ लगे हैं। आपको बता दें कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मौलाना मसूद अजहर है। वह भारत में कई आतंकी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश के ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई थी.जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान के डिजिटल ऐप ‘Sadapay’ जैसे ई-वॉलेट्स के जरिए फिदायीन दस्ता तैयार करने के लिए डोनेशन ले रहा है। इसका मकसद डिजिटल हवाला को आसान बनाना और आतंकियों तक फंड तेजी से पहुंचाना है। एजेंसियां अब इस डिजिटल फंडिंग नेटवर्क और महिलाओं को जोड़ने की साजिश की गहराई से जांच कर रही हैं।लाल किला के पास हुए फिदायीन हमले की जांच में एजेंसियों ने मंगलवार को एक संदिग्ध बांग्लादेशी एबीटी सदस्य इख्तियार को पकड़ा है। सूत्रों ने बताया कि जांच का फोकस भारत-बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद पर है। जिसके बारे में इनपुट मिला था कि लश्कर ए तैयबा के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कुछ कट्टरपंथी ग्रुप संपर्क में हैं। पकड़े गए कथित बांग्लादेशी एबीटी मेंबर से पूछताछ चल रही है। जांच ऐजेंसी लाल किले के पास हुए आतंकी हमले में बांग्लादेश कनेक्शन की पुष्टि करने में जुटी हैं।पकड़े गए संदिग्ध का प्रतिबंधित संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से जुड़े होने का शक है। जांच ऐजेंसी से जुड़े सूत्र का कहना है कि संदिग्ध इख्तियार एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जिसने विस्फोट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद की है। एजेंसियों का मानना है कि इस संदिग्ध का साजिश में बॉर्डर पार से लिंक है। पांच दिन पहले जांच एजेंसियों को पता चला था कि बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों और लश्कर ए तैयबा के बीच ऑनलाइन विडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग हुई थी। इसमें एलईटी का टॉप कमांडर सैफुल्लाह सैफ और बांग्लादेशी सरकारी अधिकारी शामिल हुए थे।




