भारत बनाएगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO ने शुरू किया काम


Delhi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक और छलांग लगाने की तैयार कर रहा है। स्पेस एजेंसी ने अपनी अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की नींव रख दी है। भारतीय उद्योग जगत को साथ आने का न्योता दिया है। यह कदम भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी ठिकाना (स्टेशन) है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) ने भारतीय कंपनियों के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) जारी किया है। इसके जरिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल, BAS-01 के निर्माण के लिए आमंत्रित किया गया है।ISRO के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के बाद अगला कदम है. गगनयान के जरिए भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा तक भेजने की तैयारी कर रहा है, जबकि BAS के माध्यम से लक्ष्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक इंसानी उपस्थिति स्थापित करना है. सरल शब्दों में कहें तो भारत अब केवल अंतरिक्ष में जाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां रहकर वैज्ञानिक शोध और तकनीकी प्रयोग भी करेगा.BAS-01 मॉड्यूल का स्ट्रक्चर अल्ट्रा मॉडर्न होगा. प्रत्येक मॉड्यूल का व्यास लगभग 3.8 मीटर और ऊंचाई करीब 8 मीटर होगी. इन्हें हाई-पावर्ड एल्यूमिनियम एलॉय (AA-2219) से तैयार किया जाएगा, जो ह्यूमन मिशनों के लिए मान्यता प्राप्त सामग्री है. ISRO ने स्पष्ट किया है कि इन मॉड्यूल्स को वही सुरक्षा और गुणवत्ता मानक पूरे करने होंगे, जो गगनयान मिशन के लिए अनिवार्य हैं, क्योंकि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री इन्हीं मॉड्यूल्स के भीतर रहकर काम करेंगे.ISRO ने दो पूर्ण सेट मॉड्यूल धरती पर तैयार करने की योजना बनाई है, ताकि परीक्षण और गुणवत्ता मूल्यांकन के बाद सर्वश्रेष्ठ हार्डवेयर को अंतरिक्ष में भेजा जा सके. यह कार्य सामान्य निर्माण प्रक्रिया से कहीं अधिक जटिल है. कंपनियों को विशेष वेल्डिंग तकनीकों का विकास करना होगा और हाई स्टैंडर्ड का पालन करना होगा. आधे मिलीमीटर की भी त्रुटि स्वीकार्य नहीं होगी. इसके अलावा प्रेशर टेस्ट, लीक टेस्ट और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग जैसी कठोर प्रक्रियाओं से गुजरना अनिवार्य होगा.




