ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत पर हिदायतुल्लाह खान ने गहरा शोक व्यक्त किया


रांची/जमशेदपुर: झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हाजी हिदायतुल्लाह खान ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ही एक ऐसा देश है जो बैतुल मुकद्दस (यरूशलम) की रक्षा और अस्तित्व के लिए इज़राइल और अमेरिका के खिलाफ डटकर खड़ा रहा और उनके हर हमले का बहादुरी और हिम्मत के साथ जवाब देता रहा।
उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं और ईरान ने भारत को हमेशा अपना सच्चा मित्र माना है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों को रोकने और युद्धविराम के लिए पहल की जाए।
अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम विश्व के लिए एक बड़ी क्षति है। हिदायतुल्लाह खान ने अमेरिका और इज़राइल की इस आक्रामक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि शक्ति के बल पर किसी देश के नेतृत्व को निशाना बनाना विश्व शांति के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है। ऐसे कदमों से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ेगा और पूरी दुनिया इसके नकारात्मक प्रभावों से प्रभावित होगी।
अध्यक्ष ने भारत सरकार से अपील की कि वह इस मामले में संतुलित, न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण रुख अपनाए तथा वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाए।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतांत्रिक दुनिया के तथाकथित नेताओं द्वारा किसी संप्रभु राष्ट्र के नेतृत्व की टारगेट किलिंग और अनेक निर्दोष लोगों की हत्या निंदनीय है, चाहे इसके पीछे कोई भी घोषित कारण क्यों न हो। दुनिया को अनावश्यक युद्धों की नहीं, बल्कि शांति की आवश्यकता है।
उन्होंने अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे केवल अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए लगातार आपराधिक और हिंसक कार्रवाइयाँ कर रहे हैं। वे फिलिस्तीन में बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों की हत्या कर रहे हैं और वहां की जमीन को अपने में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खामनेई का निधन एक युग के अंत का प्रतीक है और भारत एक सच्चे मित्र से वंचित हो गया है। ईरान भारत का पारंपरिक मित्र रहा है। उसने हमेशा पाकिस्तान के खिलाफ भारत का साथ दिया, कश्मीर मुद्दे पर भारत के पक्ष में वोट किया, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दिया और सस्ता तेल उपलब्ध कराया।
अंत में उन्होंने कहा कि आज ईरान संकट के दौर से गुजर रहा है और भारत को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।




