बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला – दो जज बर्खास्त


नई दिल्ली: बॉम्बे हाई कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए निचली अदालत के दो जजों को कदाचार के आरोप में बर्खास्त कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धनंजय निकम और दीवानी न्यायाधीश इरफान शेख को हाई कोर्ट की अनुशासन समिति की गहन जांच के बाद सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश धनंजय निकम पर रिश्वतखोरी का आरोप था, जबकि न्यायाधीश इरफान शेख पर भ्रष्टाचार और जब्त किए गए नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा था। बताया जा रहा है कि शेख एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई कर रहे थे। उनके खिलाफ दायर एक याचिका अब भी उच्च न्यायालय में लंबित है।
निकम के खिलाफ रिश्वत का मामला दर्ज
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने सातारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय निकम के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में जमानत देने के लिए ₹5 लाख की रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार, एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पिता को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, और जब उसने अपने पिता की जमानत के लिए सातारा सत्र न्यायालय में याचिका दायर की, तो जज निकम ने उस पर अप्रत्यक्ष रूप से रिश्वत का दबाव डलवाया।
एसीबी की जांच में पाया गया कि निकम के कहने पर मुंबई निवासी किशोर संभाजी खरात और सातारा निवासी आनंद मोहन खरात ने महिला से ₹5 लाख की मांग की थी। 3 से 9 दिसंबर 2024 के बीच एसीबी द्वारा की गई जांच में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी ने निकम, संभाजी खरात, मोहन खरात और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
निकम ने खुद को निर्दोष बताते हुए जनवरी 2025 में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने मार्च में उनकी जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ लगे आरोप गंभीर और न्यायिक आचरण के विपरीत हैं।
इरफान शेख पर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का आरोप
वहीं, दीवानी न्यायाधीश इरफान शेख पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और जब्त किए गए नशीले पदार्थों का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि शेख एनडीपीएस मामलों की सुनवाई के दौरान जब्त मादक पदार्थों को अपने निजी उपयोग के लिए हेराफेरी करते थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों जजों को बर्खास्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका की ईमानदारी और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि न्याय के मंदिर में बैठे लोग यदि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जा सकता।
इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में एक कड़ा कदम माना जा रहा है। न्यायालय ने साफ किया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या शक्ति के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



