कुड़माली भाषा को लेकर बड़ा कदम, सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा ज्ञापन



जमशेदपुर : कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग अब केंद्र सरकार के सामने पहुंच गई है। जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो समेत चार सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सांसदों ने कहा कि कुड़माली को संवैधानिक मान्यता देने की मांग लंबे समय से उठ रही है और यह लाखों लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक व सामाजिक पहचान से जुड़ा विषय है। कुड़माली पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के जंगलमहल क्षेत्र में व्यापक रूप से बोली जाती है। झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां तथा ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी इसके बोलने वालों की बड़ी आबादी है।


सांसदों ने गृह मंत्री से इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया। अमित शाह ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और कहा कि कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग जायज है तथा यह व्यापक जनहित से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और कुड़माली समेत कुछ अन्य भाषाओं का मामला लंबित है, जिस पर जल्द पहल की जाएगी। आठवीं अनुसूची में शामिल होने से कुड़माली भाषा और साहित्य के संरक्षण, शैक्षणिक व शोध कार्यों को बढ़ावा मिलने तथा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत मान्यता मिलने की उम्मीद है। प्रतिनिधिमंडल में विद्युतवरण महतो, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद खीरू महतो शामिल थे।


