मलेरिया का बढ़ता खतरा: 42 हजार से ज्यादा केस, पश्चिमी सिंहभूम बना ‘हॉटस्पॉट’, सरकार का मास्टर प्लान तैयार


RANCHI: झारखंड में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 42,236 मलेरिया के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा केस पांच जिलों—चाईबासा, सरायकेला, साहिबगंज, खूंटी और गोड्डा से दर्ज किए गए हैं। इनमें पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) सबसे अधिक प्रभावित है, जहां अकेले 16,553 मामले सामने आए हैं और इसे राज्य का प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ माना जा रहा है।

स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मानसून से पहले विशेष ‘मास्टर प्लान’ लागू किया है। इसके तहत जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर मच्छरों के पनपने की संभावना को खत्म करने, साथ ही ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। दूरदराज के इलाकों जैसे गुमला, सिमडेगा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा में भी संक्रमण का असर देखा जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, कुल मामलों में 30,545 केस प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम और 9,475 प्लास्मोडियम विवैक्स के हैं, जबकि अब तक दो मौतें (धनबाद और साहिबगंज में) दर्ज हुई हैं। वहीं रांची में जनवरी से मार्च के बीच 34,673 सैंपल जांच में सिर्फ 8 मामले पॉजिटिव पाए गए, जिससे राजधानी में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।


