बलोचों के हमले में 20 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत,


बलूचिस्तान : बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के हाथों 41 लोगों की हत्या के बाद बलोच लिबरेशन ऑर्मी के लड़ाके भड़क उठे हैं। बीएलए के हथियारबंद सदस्यों ने बलूचिस्तान के अंदर राजधानी क्वेटा समेत 12 शहरों में शनिवार सुबह से ही भीषण जवाबी हमला शुरू किया है। बीएलए ने ऑपरेशन हेरोफ के दूसरे चरण को शुरू कर दिया है। बलूचों का दावा है कि इस जवाबी हमले में कम से कम 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। बलूचों ने वीडियो जारी करके दिखाया है कि बलूचिस्तान की सड़कों पर बीएलए के लड़ाके भारी तादाद में घूम रहे हैं। केवल नोशकी इलाके में कम से कम 8 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। बलूचों ने सेंट्रल जेल पर कब्जा कर लिया है। दोनों पक्षों में भारी लड़ाई हुई है। बलूचों का दावा है कि पाकिस्तानी सेना पीछे हट गई है और लड़ाकू हेलिकॉप्टर की मदद से हमले कर रही है।बलूचिस्तान पोस्ट अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी तादाद में बीएलए के लड़ाके पहुंचे हैं। क्वेटा में कई जोरदार धमाके सुने गए हैं। बलूचिस्तान में सभी रेल सेवाओं को रोक दिया गया है। क्वेटा के सभी अस्पतालों में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया गया है। बलूचों ने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है और कैदियों को रिहा कर दिया है। पाकिस्तानी सेना पीछे हट गई है और अब लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की मदद से हमले किए जा रहे हैं।बलूचों ने एक वीडियो में दिखाया है कि कैसे पाकिस्तानी सैनिकों का एक वाहन पूरी तरह से हमले में तबाह हो गया। बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता जियांद बलोच ने एक बयान जारी करके बताया कि ऑपरेशन हेरोफ का दूसरा चरण शुरू हो गया है। बीएलए के चीफ बशीर जेब ने आम जनता से अपील की है कि वे बीएलए के लड़ाकुओं की मदद करें। बशीर जेब ने कहा कि यह अभियान अपने मातृभूमि की रक्षा के लिए शुरू किया गया है।जियांद बलोच ने कहा कि बलूच हर शहर, गली और पड़ोस से दुश्मन का सफाया करेंगे। बलूचिस्तान में कब्जा करने वाली ताकतों के लिए कोई भी जगह नहीं है। ऑपरेशन हेरोफ को पहली बार बलोचों ने अगस्त 2024 में शुरू किया था। इसे बलूचिस्तान पर फिर से कब्जा करने के लिए किया गया था। इस पहले चरण के दौरान बीएलए ने 130 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया था। बलूचों ने प्रमुख हाइवे और प्रतिष्ठानों पर भी कब्जे का दावा किया था। इसमें एक सैन्य अड्डे पर 20 घंटे तक कब्जा किया गया था। यह अब तक का बलूचों का सबसे बड़ा हमला था।




